सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा व आरएसएस, दोनों का चरित्र संदिग्ध है। इनकी कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर पाया जाता है। कहने को बड़े-बड़े वादे, मीठी-मीठी बातें लेकिन हकीकत में झूठ और कुप्रचार ही दिखाई देता है। मुख्यमंत्री न तो किसानों-नौजवानों का हित कर पाए हैं और न ही बहू-बेटियों की इज्जत बचा पाते हैं। असफल भाजपा सरकार प्रदेश की जनता पर भार बन गई है।
अखिलेश यादव ने बुधवार को बयान में कहा कि मुख्यमंत्री को विपक्ष से शिकायतें ही शिकायतें हैं। उन्हें हर समय कुर्सी जाने का डर सताता है। कभी उन्हें कोई साजिश दिखती है तो कभी विपक्ष के पास विजन न होने की शिकायत होती है। सच्चाई इसके उलट है। साजिश रचने में भाजपा की महारत में किसी को तनिक भी संदेह नहीं। रही बात विजन की तो भाजपा का विजन साफ है, समाज को बांटना और नफरत पैदाकर सामाजिक सद्भाव को नष्ट करना है। मुख्यमंत्री को इधर-उधर की बहानेबाजी छोड़कर बताना चाहिए कि प्रदेश साढ़े तीन वर्षों में तबाही के रास्ते पर क्यों चला गया ? प्रदेश में जंगल राज है।
एक बेटी पर हुए अत्याचार को विपक्षी साजिश बता आधीरात में उसका शव जलाने वाली निर्लज्ज सरकार अब क्या बहाना पेश करेगी। सपा अध्यक्ष ने कहा, हर 15 मिनट में यहां रेप की एक घटना हो रही है। हाथरस में एक बार फिर हैवानित हुई है। इगलास में 6 साल की बच्ची से रेप और इलाज के बीच बेटी को दम तोड़ देना अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ अपराध वर्ष 2018 में 59445 थे जो वर्ष 2019 में 59853 की संख्या में पहुंच गए। कानून व्यवस्था का भारी संकट है। राज्यपाल को इसका स्वत: संज्ञान लेकर संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए केंद्र को प्रदेश के बिगड़ते हालात पर संस्तुति भेजनी ही चाहिए।
1000-1300 रुपये कुंतल बिक रहा धान
उन्होंने कहा, जिस धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1888 रुपये प्रति कुंतल है उसे किसान 1000 से लेकर 1300 रुपये कुंतल में बेचने को मजबूर है। क्या किसान की आय दोगुनी करने का यही तरीका है ? किसान को अगली फसल बोने के लिए खाद, बीज, डीजल, कीटनाशक की जरूरत पर कर्ज लेना ही होगा? जब कर्ज से उबरने का कोई तरीका नहीं दिखता है तो किसान आत्महत्या कर लेता है। उन्होंने कहा कि महाराजगंज के मौजा गांव के किसानों ने निजी कंपनी से 360 रुपये किलो के हिसाब से धान का बीज खरीद कर रोपाई की लेकिन बाली निकलने के बाद उसमें दाने नहीं आए हैं। अब किसान क्या करें?
भर्तियों का हल्ला, छटनी पर जोर
अखिलेश यादव ने कहा, प्रदेश में पढ़ा-लिखा नौजवान मारा-मारा घूम रहा है। न तो पूंजी निवेश हो रहा है और न ही नए उद्योग लग रहे है। भर्तियों का हल्ला लेकिन छंटनी पर जोर है। स्कूल कालेज बंद है, अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव है। गांवों में बिजली नहीं, नेट कनेक्शन नहीं, लैपटाप-स्मार्टफोन नहीं, पर सरकार ऑनलाइन पढ़ाई के कसीदे पढ़ रही है।