रायबरेली। हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर और शरीर से अक्षम मरीजों की जांच और इलाज के लिए जिले में 12 एनसीडी (नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज) क्लीनिकोंं में डॉक्टर नहीं हैं। मात्र पांच में ही डॉक्टर हैं। लालगंज में तैनात डॉक्टर को सीएमओ कार्यालय के कंट्रोल रूम से संबद्ध रखा गया है। डॉक्टरों के अभाव में क्लीनिक राम भरोसे संचालित हैं। मरीजों को शासन की मंशा के अनुरूप चिकित्सीय सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
जिले की सभी 17 सीएचसी में मरीजों को असाध्य बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधा दिलाने के लिए एनसीडी क्लीनिकें संचालित की गई हैं। शुरू में क्लीनिकों में डॉक्टरों की तैनाती की गई, लेकिन धीरे-धीरे डॉक्टर काम छोड़कर चले गए।
वर्तमान में अमावां, ऊंचाहार, बछरावां, शिवगढ़ और महराजगंज सीएचसी स्थित क्लीनिकों में ही डॉक्टर काम कर रहे हैं। लालगंज स्थित एनसीडी क्लीनिक के डॉक्टर को सीएमओ कार्यालय के कंट्रोल रूम से संबद्ध किया गया है। शेष क्लीनिकों में डॉक्टरों के पद भरने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है।
एनसीडी क्लीनिकों में सात पद, दो-तीन से चला रहे काम
एनसीडी क्लीनिकों के लिए सात-सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें एक डॉक्टर, स्टॉफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, ईसीजी एलटी, काउंसलर, डाटा इंट्री ऑपरेटर, लैब असिस्टेंट और फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती होनी है, लेकिन कहीं दो तो कहीं तीन स्टॉफ से काम चलाया जा रहा है। ईसीजी मशीनें हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए कोई एलटी या टेक्नीशियन नहीं है। सीएचसी पर काम कर रहे सेल महज ब्लड, शुगर की जांच करने और ब्लड प्रेशर मापने तक ही सीमित हैं।
क्लीनिक पर यह सुविधाएं जरूरी
एनसीडी क्लीनिकों में ईसीजी मशीन, मल्टी चैनल मानीटर, ब्लड शुगर टेस्ट यूनिट, सर्वाइकल ट्रैक्शन मानीटर, शार्टवेयर ट्राइथेरेपी, यूरीन टेस्ट यूनिट आदि जांचों की सुविधाएं मरीजों को मिलनी चाहिए, लेकिन डॉक्टर व अन्य स्टाफ न होने के कारण जांच की सभी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
सीएचसी स्तर पर संचालित एनसीडी क्लीनिकों में डॉक्टरों की व्यवस्था कराई जा रही है। पांच क्लीनिकों में डॉक्टर काम कर रहे हैं। अन्य में भी जल्द ही डॉक्टर तैनात होंगे। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ