बता दें कि एटीएस ने इस प्रकरण की जांच में देरी कर दी, जिससे तमाम सुबूत नष्ट हो गए। इसे लेकर उच्चाधिकारियों ने नाराजगी भी जताई है। दरअसल, इस प्रकरण की जांच एसटीएफ ने बीते वर्ष फरवरी माह में शुरू की थी, जिसके बाद नवंबर में अपनी रिपोर्ट देने के साथ एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें नामजद छांगुर के बेटे महबूब और नवीन रोहरा को एटीएस अप्रैल माह में गिरफ्तार कर सकी। इससे छांगुर सतर्क हो गया और उसने सुबूतों को नष्ट करना शुरू कर दिया। यही वजह है कि एटीएस को रिमांड के दौरान छांगुर के खिलाफ ठोस सुबूत मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।