मायावती सरकार के दौरान करोड़ों खर्च कर बने स्मारकों में हुए घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने भले ही ताबड़तोड़ छापेमारी की हो लेकिन विजिलेंस की जांच रफ्ता-रफ्ता आगे बढ़ रही है। विजिलेंस को जांच के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विजिलेंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर की है। इस जांच में अधिकारियों को मिर्जापुर से लेकर राजस्थान तक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पत्थर ढुलाई में इस्तेमाल किए गए एक-एक ट्रक को सत्यापित किया जा रहा है। इस काम के लिए हजारों ट्रकों का इस्तेमाल किया गया था। ऐसे में एक-एक ट्रक को सत्यापित करना आसान काम नहीं है।
सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान नंबर के सहारे कुछ ट्रक मालिकों तक जब विजिलेंस की टीम पहुंची भी तो पता चला कि मामला इतना पुराना हो चुका है कि कुछ ट्रक तो दो-दो बार बिक चुके हैं। ऐसे में उसका असली मालिक कौन है और 8-10 साल पुराने दस्तावेज उसके पास से रिकवर हो पाएं, इसकी संभावना भी कम ही रहती है।
राजस्थान में जिन स्थानों पर पत्थरों को तराशने की बात कही जा रही है, उनमें से कुछ स्थान ऐसे भी पाए गए जहां पत्थर तराशने के कोई सुबूत नहीं मिले। इसके लिए विजिलेंस की टीमें कई बार राजस्थान के चक्कर लगा चुकी हैं। ऐसे में विजिलेंस दूसरे तौर-तरीकों से आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है।
विजिलेंस विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इस मामले में अभियोजन स्वीकृति जैसी कोई अनुमति शासन से नहीं मांगी गई है। विवेचना के दौरान जो नाम सामने आए थे, उनकी जांच करने के लिए अनुमति शासन से जरूर मांगी थी, जो मिल भी गई है और विजिलेंस की तफ्तीश जारी है।
देर रात तक चली छापेमारी, दस्तावेजों को खंगाल रहा ईडी
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से बृहस्पतिवार को की गई छापेमारी देर रात तक चली। इस दौरान कई अहम दस्तावेज, कंप्यूटर और हार्ड डिस्क जब्त की गई हैं। बरामद दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल घोटाले से हासिल की गई रकम की चेन तलाशी जा रही है। आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के यहां ईडी सर्च कर सकता है।