उन्होंने कहा कि बात करने के बाद उनका मामला एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट में तुरंत अनुमोदित हो जाएगा। उनके कहने पर मैंने जैन नामक व्यक्ति से बात की, जिसने 5 फीसद कमीशन देने की बात कही और एडवांस मांगा। मेरे ग्रुप के मालिक इस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुके थे, जिसकी वजह से मैंने पैसा देने से मना कर दिया।
बाद में मुझे पता चला कि मेरे मामले में संस्तुति के बावजूद पत्रावली में प्रकरण को टाल दिया गया है। जैन से बात करने पर उसने कहा कि मैं और मेरे मालिक चाहे जितना भी प्रयास कर लें, उन्हें हमारे पास ही आना होगा, अन्यथा काम नहीं होगा। मुख्य सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि मेरे मालिक इस प्रोजेक्ट को दूसरे प्रदेश में ले जा सकते हैं। लिहाजा इन लोगों पर कार्रवाई करने के साथ प्रोजेक्ट को मंजूर किया जाए।
जांच में आरोप सही मिले
मुख्य सचिव से शिकायत के बाद जब इस प्रकरण की गोपनीय जांच कराई गई तो आरोप सही पाए गए। जिसके बाद पूरे प्रकरण से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री ने तत्काल इंवेस्ट यूपी के सीईओ अभिषेक प्रकाश को निलंबित करने और पूरे प्रकरण की जांच के लिए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। जिसके बाद पुलिस ने बिचौलिए निकांत जैन को चिन्हित करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
प्राधिकरणों में लटकी फाइलों पर सरकार सख्त
वरिष्ठ आईएएस अभिषेक प्रकाश पर कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि सीएम भ्रष्टाचार को किसी को रियायत देने के मूड में नहीं है। खास तौर से फाइल लटकाने वाले मामलों को लेकर सीएम कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं। सूत्रों की मानें तो इस प्रकरण सामने आने के बाद सरकार इंवेस्ट यूपी में लंबित अन्य प्रकरणों की जांच कराने के अलावा विकास प्राधिकरणों में लंबित फाइलों पर भी सख्ती की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि अयोध्या औरा वाराणसी विकास प्राधिकरणों में महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देने से संबंधित फाइलें काफी दिनों से लटकाई जा रही है। इस संबंध में तमाम शिकायतें ऊपर तक पहुंची है। चूंकि अयोध्या और वाराणसी सरकार की प्राथमिकता में है। इसलिए सरकार जल्द ही सख्ती से कार्रवाई कर सकती है।