लखनऊ। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष पर सेमिनार हुआ। इसमें भारत, नेपाल, मॉरीशस आदि देशों से ज्योतिषशास्त्र के विद्वान ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
नेपाल पंचांग निर्णायक विकास समिति के अध्यक्ष प्रो. श्रीकृष्ण अधिकारी ने कहा कि भारत और नेपाल की संस्कृति और सभ्यता, व्रत, पर्व और धर्माचरण एक जैसे हैं। इसलिए दोनों देशों के पंचाग निर्माण का आधार ग्रंथ और उनके अनुसार व्रत व पर्व समान तिथियों में होने चाहिए। इसके लिए दोनों देशों को सम्मिलित प्रयास करना चाहिए। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के उत्तराखंड स्थित देवप्रयाग परिसर के निदेशक आचार्य पीवीबी सुब्रह्मणयम ने कहा कि हमें अपने आलोचकों को आमंत्रित करना चाहिए। जिज्ञासुओं या आम जनता के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम करना और ज्योतिष के तथ्यों के प्रति गवेषणा के लिए उनको प्रेरित करना समय की मांग है।
उद्घाटन सत्र में परिसर के निदेशक प्रो. सर्वनारायण झा ने कहा कि भारतीय परंपरा का पालन करने वाले लोग भारतीय धर्मशास्त्र के अनुसार व्रत, पर्व व त्योहार का पालन करते हैं और इन्हें सूर्य, चन्द्रमा व अन्य ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर मनाया जाता है। इसलिए उससे उत्पन्न स्थिति के कारण व्रत, पर्व, त्योहार एक जैसा होना स्वाभाविक है, उसमें अतिसूक्ष्म अन्नार मात्र अक्षांश, देशानार आदि के कारण या विभिन्न ऋषि परंपरा के कारण हो सकते हैं, लेकिन बिल्कुल अलग-अलग नहीं हो सकते। इसे एकरूप बनाने के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय कार्य कर रहा है।
सिद्धान्त ज्योतिष के ग्रन्थों को परिष्कृत किया जाए
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि आज इसकी आवश्यकता है कि भारतीय परंपरा के सिद्धान्त ज्योतिष के ग्रन्थों को परिष्कृत किया जाए। संपूर्ण देश में पंचाग की परम्परा अलग-अलग हो किंतु गणित तो एक ही है। धन्यवाद ज्ञापन ज्योतिष विभागाध्यक्ष डाॅ. हरिनारायणचर द्विवेदी ने किया। इस मौके पर लोकमान्य मिश्र, प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, प्रो. धनीन्द्र कुमार झा, प्रो. गुरुचरण सिंह नेगी सूचना उपायुक्त डाॅ. तेजस्कर पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।