केंद्र सरकार की मदद से 2009 में अचीरा लैब नामक स्टार्टअप शुरू करने वाले डॉ. धनंजय देंडीकुरी ने बताया कि देश के दूर-दराज के इलाकों में मरीजों की जांच लैब स्थापित करना सबसे कठिन काम है। ज्यादा लागत के अलावा तकनीकी स्टाफ की कमी भी बड़ी समस्या बनती है। ऐसे में एक छोटी मशीन का उपयोग कर आठ सबसे जरूरी टेस्ट कराए जाने की शुरुआत की गई। नमूने की जांच के बाद मशीन रिपोर्ट जारी कर देती है। जरूरी प्रशिक्षण के बाद कोई भी व्यक्ति इस मशीन का उपयोग कर सकता है।
विज्ञान महोत्सव में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराने को शाम तक लाइन लगी रहीं। आयोजकों ने गेट नंबर-1, गेट नंबर-2 पर पंजीकरण काउंटर बनाए हुए थे। दोनों ही काउंटर्स पर प्रतिनिधिमंडल, विजिटर्स के पास बनते रहे। पास नहीं बन पाने की वजह से सुबह के समय मुख्य प्रतिनिधियों और अलग-अलग संस्थानों से आए प्रमुख रिसोर्स पर्सन तक की एंट्री रुक गई। इसकी शिकायत होने पर सुरक्षाकर्मियों को कुछ लोगों को बिना पास के ही अंदर जाने की अनुमति देनी पड़ी।