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कोविड जांच के लिए सीडीआरआई ने बनाई स्वदेशी किट ‘इंडीफ्लोर कोविड’,

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कोविड टेस्ट की तकनीकी ट्रांसफर करते निदेशक तापस कुंडू (बीच में)।
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लखनऊ। कोरोना जांच के लिए केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) ने स्वदेशी व आत्मनिर्भर किट ‘इंडीफ्लोर कोविड’ तैयार की है। इसे तैयार करने में उपयोग होने वाली फ्लोरोसेंट डाई और क्वेंचर्स को सीडीआरआई ने विकसित कर लिया है। इसके लिए अभी तक हम यूरोप व अमेरिका पर निर्भर हैं।
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संस्थान के 70वें स्थापना दिवस पर इंडीफ्लोर कोविड किट की विकसित तकनीक को हैदराबाद की कंपनी बायोटेक डेस्क को दिया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. तापस कुंडू का कहना है कि फ्लोरोसेंट डाई- सीडीआरआई-केडी1, सीडीआरआई-केडी1एजेड3 के अलावा क्वेंचर्स- सीडीआरआई-केक्यू3, सीडीआरआई-केक्यू4 का उपयोग कर जांच किट विकसित की गई है। स्वदेशी तकनीक से तैयार इस किट का उपयोग कोविड के सटीक परीक्षण के अलावा सीरोलॉजिकल टेस्ट में भी किया जा सकेगा। तकनीक विकसित करने वाली टीम के प्रमुख डॉ. अतुल गोयल ने बताया कि केवल बीते सात माह में इसे तैयार किया गया है। अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की अनुमति के बाद इसका उपयोग किया जा सकेगा। इसमें दो माह तक लग सकते हैं। कोविड जांच के लिए क्यू-आरटीपीसीआर सबसे भरोसेमंद माध्यम है। इस टीम में डॉ. गोयल के साथ अन्य वैज्ञानिक डॉ. आशीष अरोड़ा, डॉ. नीति कुमार, डॉ. एन दामोदर रेड्डी शामिल हैं।
डॉ. गोयल ने बताया कि जांच के लिए अभी लगभग 90 प्रतिशत मैटेरियल जैसे टैकमैन प्रोब आदि जर्मनी, यूएसए, यूके से आयात करना पड़ता है। अब हमें केवल 10 प्रतिशत कच्चा माल ही आयात करना होगा। देश में शुरूआती कोरोना जांच 4000 रुपये से अधिक थी। अब भी 700 रुपये से अधिक लग रहे हैं। नई किट के उपयोग से जांच 30 प्रतिशत तक कम कीमत में हो सकेगी। किट का उत्पादन शुरू होने पर इसमें और कमी आएगी।
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