आयुषी उपाध्याय के अनुसार, ज्यादातर विद्यार्थी कांसेप्ट को समझने में ध्यान नहीं लगाते, रटने की कोशिश करते हैं। जब तक दिमाग में किसी प्रकार का संशय हो उसका पीछा नहीं छोड़ना चाहिए। एक बार कांसेप्ट क्लीयर होने के बाद विषय को रटना नहीं पड़ता है। परीक्षा में आप अच्छी तरह से उसका जवाब दे पाएंगे।
अपने दम पर हासिल की सफलता
आयुषी ने देश में तीसरा स्थान हासिल करने के लिए किसी प्रकार की कोचिंग या फिर ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। उन्होंने बताया कि स्कूल में शिक्षकों से विषय को समझने के अलावा घर पर ही पढ़ाई की। इसलिए कभी भी कोचिंग की जरूरत ही महसूस नहीं हुई।