हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए लड़ रहे बुजुर्ग श्रवण साहू की बेरहमी से हत्या के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी इस मामले में पुलिस की भूमिका की भी पड़ताल करे। साथ ही यह भी पता करे कि क्यों श्रवण साहू को सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई।
जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस संजय हरकौली ने यह आदेश अधिवक्ता प्रिंस लेनिन के ‘वी द पीपल’ संगठन की याचिका पर दिए। याचिका में हत्याकांड की सीबीआई जांच कराए जाने की गुजारिश की गई थी।
याची संगठन का कहना था कि सीबीआई के जरिए ही श्रवण साहू हत्याकांड के लिए जिम्मेदार और जुड़े पुलिस वालों की निष्पक्ष जांच हो सकती है।
जान का खतरा था फिर भी क्यों नहीं दी सुरक्षा
पुलिस कर्मियों की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैये की वजह से ही श्रवण साहू को जान से हाथ धोना पड़ा। लेनिन ने बताया कि अदालत ने अपने निर्देशों में सरकार को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपने के लिए कहा है।
सवाल...जान का खतरा था फिर भी सुरक्षा क्यों नहीं दी
हाईकोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर को कहा है कि श्रवण साहू की जान को खतरा होते हुए भी पुलिस ने उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई, ऐसा क्यों किया गया, इसकी जांच करें।
निलंबित आरआई की बहाली क्यों?
अदालत ने आईजी स्थापना को व्यक्तिगत तौर पर हलफनामा दाखिल करते हुए यह बताने के लिए कहा है कि जब एसएसपी लखनऊ ने रिजर्व इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया था तो उनका सस्पेंशन क्यों वापस लिया गया।