सीबीआई ने लखनऊ में 1500 करोड़ रुपये की गोमती रिवर फ्रंट विकास परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच अपने हाथ में ले ली है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने आठ इंजीनियरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने गोमती रिवर सौंदर्यीकरण परियोजना की जांच शुरू की थी। गोमती रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण का काम समाजवादी पार्टी सरकार के समय हुआ था।
आदित्यनाथ सरकार इस मामले का सीबीआई को सौंपना चाहती थी। जांच एजेंसी ने बृहस्पतिवार को जांच संभाल ली। राज्य सरकार ने ‘गोमती रिवर चैनेलाइजिंग’परियोजना और गोमती रिवर फ्रंट विकास योजना के क्रियान्वयन में ‘आपराधिक इरादे’ के साथ बरती गई अनियमितताओं की जांच के लिए कहा था।
ये विकास परियोजनाएं राज्य के सिंचाई विभाग की तरफ से क्रियान्वित की गई थीं। सीबीआई ने मुख्य इंजीनियर गुलेश चंद्र, एस एन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन इंजीनियर मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और कार्यकारी इंजीनियर सुरेंद्र यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
अधिकारियों ने बताया कि गुलेश चंद्र, शिव मंगल यादव, अखिल रमन और रूप सिंह यादव अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस आलोक कुमार सिंह के नेतृत्व में समिति का गठन किया था।
इस समिति ने 16 मई, 2016 को अपनी रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं का संकेत दिया था। यूपी पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर 19 जून को मामला दर्ज किया था। केंद्र सरकार ने 24 नवंबर 2017 को इस मामले को सीबीआई को सौंपा था। प्रक्रिया के अनुसार एजेंसी ने गोमती नगर थाने में फिर से प्राथमिकी दर्ज की।