उन्नाव प्रकरण में रातोरात नोटिफिकेशन जारी कर कुछ घंटों में केस दर्ज करने वाली सीबीआई राजेश साहनी की मौत के मामले में अभी तथ्यों को ही परख रही है। साहनी की मौत के छह दिन बीत चुके हैं पर अधिकारी मौत की वजह, सुसाइड किया तो किसने उकसाया, पारिवारिक कलह या काम का दबाव जैसे सवालों के उत्तर ढूंढ रहे हैं।
लोगों को उम्मीद थी कि मामला आतंकवाद और आईएसआई एजेंट की तफ्तीश से जुड़ा होने के कारण सीबीआई तत्परता दिखाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ। इस घटना के दूसरे दिन ही डीजीपी ने एडीजी जोन से जांच करने के निर्देश दिए उसके बाद सरकार ने सीबीआई के लिए सिफारिश कर दी।
उन्नाव प्रकरण में कहा जा रहा था कि केंद्र और यूपी में एक ही दल की सरकार है, इसलिए जांच शुरू होने में तेजी आ गई। सरकारें दोनों जगह अब भी वही हैं, फिर इतनी देरी क्यों?
दूसरी ओर लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्ण की ओर से की जा रही जांच अब तक तेजी नहीं पकड़ सकी है। सूत्रों का कहना है कि एडीजी जोन ने फोरेंसिक लैब से कुछ दस्तावेज मांगे हैं, जिससे पहले यह पुष्टि हो कि यह आत्महत्या है उसके बाद ही वह मामले से जुड़े लोगों के बयान लेंगे।
मालूम हो कि पिछले मंगलवार को राजेश साहनी ने कथित रूप से अपने दफ्तर में खुद को गोली मार कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी।