सिंचाई विभाग के कुछ अभियंताओं की प्रोन्नति का मामला विभागीय खींचतान में फंसा हुआ है। इसे लेकर हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया गया है। मामला पहले भी कोर्ट में पहुंच चुका है जिसमें अभियंताओं के पक्ष में फैसला हुआ था पर सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी जो खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद भी प्रोन्नति के मामले में कोई कार्यवाही न होने पर हाईकोर्ट ने विभाग के प्रमुख सचिव टी. वेंकटेश को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने यह अवमानना नोटिस जारी करने का आदेश अवध राज चौधरी व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्षी पक्षकार अदालत के आदेश की जानबूझ कर अवहेलना कर रहे हैं।
इस मामले में वर्ष 2009 में रिट कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि याची समेत कुछ अन्य अभियंता मुख्य अभियंता लेविल-टू के पद पर प्रोन्नति के लिए अर्ह थे पर उनको प्रोन्नति देने पर विचार नहीं किया गया। रिट कोर्ट ने 2010 में याचियों के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसके खिलाफ सर्वोच्च अदालत में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई।
सर्वोच्च अदालत ने 27 अप्रैल 2012 को यह एसएलपी खारिज कर दी थी। सरकार ने इसके बाद रिव्यू पेटीशन (पुर्नविचार याचिका) दाखिल की थी जो 13 नवंबर 2013 को खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद भी इन अभियंताओं को प्रोन्नत करने पर कोई विचार नहीं किया गया। याची पक्ष ने 2013 में हाईकोर्ट में मामला दायर किया। इस मामले में सरकार की तरफ से यह दलील दी गई कि याची पक्ष सेवानिवृत्त हो चुका है और चूंकि उनसे कनिष्ठ किसी अभियंता को प्रोन्नति नहीं दी गई है लिहाजा इन अभियंताओं को काल्पनिक प्रोन्नति (नोशनल प्रमोशन) नहीं दिया जा सकता है।
इस पर हाईकोर्ट ने 16 फरवरी 2018 को आदेश करते हुए कहा था कि आदेश जारी करने के तीन माह में याचियों को नोशनल प्रमोशन देते हुए उन्हें समस्त देयों के लाभ दिए जाएं।
इसके बाद भी आदेशों का पालन न होने पर अवमानना का वाद दायर किया गया। इस मामले में कोर्ट ने प्रमुख सचिव टी. वेंकटेश को अवमानना का नोटिस जारी करने के आदेश देते हुए कहा कि यह जाहिर हो रहा है कि इस मामले में अदालत के आदेशों की जानबूझ कर अवज्ञा की जा रही है।