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कानूनी पेंच में फंसे माया के खास, मुकदमा दर्ज

Wed, 24 Sep 2014 10:59 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
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बसपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी कर फंस गए है। उनके खिलाफ मंगलवार को धार्मिक भावना भड़काने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने एसीजेएम षष्टम की कोर्ट में परिवाद दाखिल किया है।
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कोर्ट ने परिवाद को दर्ज करते हुए परिवादी को सीआरपीसी धारा 200 के बयान दर्ज करने के लिए 30 सितंबर को तलब किया है।

वहीं, मौर्य के बयान पर बवाल शुरू हो गया है। लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदनलाल दीक्षित व महामंत्री सुरेश पांडेय के नेतृत्व में वकीलों ने मंगलवार दोपहर हाईकोर्ट चौराहे पर स्वामी प्रसाद का पुतला फूंका और रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कैसरबाग कोतवाली में तहरीर दी।
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जमकर हो रहा बवाल

इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट दर्ज करके गिरफ्तारी की मांग कर रहे वकीलों को कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। वहीं गोमतीनगर में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी स्वामी प्रसाद का पुतला फूंका।

इसके बाद नारेबाजी करते हुए छात्रों का जुलूस स्वामी प्रसाद के घर की तरफ बढ़ा। सीएमएस चौराहे से आगे बढ़ते ही पुलिस ने छात्रों को रोकने की कोशिश की। इस बीच एक जत्था मौर्य के घर के सामने पहुंचकर प्रदर्शन करने लगा। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने लाठी फटकार कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया।

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर शिवसैनिकों ने भी रोष जताया। आशियाना के रजनी खंड स्थित पार्टी कार्यालय में शिवसेना जिला प्रमुख सुरेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में बयान की निंदा की गई।

शिवसैनिकों ने स्वामी प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके गिरफ्तारी और गतिविधियों की जांच की मांग की। बैठक में हितेंद्र सिंह, बृजेश सिंह, हिमांशु शुक्ला, देवेश मिश्रा आदि मौजूद थे।
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भाजपा ने की कार्रवाई की मांग

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि हार की हाताशा से जूझ रही बसपा अब सामाजिक व्यवस्थाओं पर कुठाराघात करने में जुटी है।

बसपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य का हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ बयान इसी का हिस्सा है। यदि बसपा इससे सहमत नहीं है तो मायावती को मौर्य पर कार्रवाई करनी चाहिए।

पाठक ने कहा कि मौर्य कोई धर्मगुरु नहीं हैं। उन्हें यह अधिकार किसने दिया कि वे हमारी सामजिक मान्यताओं पर कुठाराघात करें।
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