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Lucknow News: नकली दवाओं की बिक्री, फर्जी बिल और जीएसटी चोरी मामले में पांच पर मुकदमा

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एफएसडीए ने की थी जांच। - फोटो : file photo
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लखनऊ। एफएसडीए के औषधि निरीक्षक की तहरीर पर नकली दवाओं की बिक्री, फर्जी बिल बनाने और जीएसटी चोरी के आरोप में कैसरबाग थाने में पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई रद्द हो चुके औषधि लाइसेंस के इस्तेमाल और डिजिटल रिकॉर्ड हटाने के मामले में की गई है। जांच में नामी कंपनियों की नकली दवाएं बेचने और फर्जी इनवॉइस जारी करने का खुलासा हुआ है।
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सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश यादव ने बताया कि जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड ने शिव शक्ति मेडिकल से संदिग्ध दवाओं की आपूर्ति की शिकायत की थी। जांच के दौरान 10 सितंबर 2025 को दुकान बंद मिली थी। गंभीर अनियमितताओं के कारण 5 जनवरी 2026 को फर्म का औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद, फर्म के नाम से दवाओं की खरीद-बिक्री जारी रही। जुलाई में गाजियाबाद की एक दवा फर्म से ग्लेनमार्क कंपनी की टेल्मा-एएम और टेल्मा-एच ब्रांड की संदिग्ध दवाएं बरामद हुईं।
इनकी बिक्री शिव शक्ति मेडिकल के नाम से जारी फर्जी इनवॉइस के जरिये सामने आई। मुख्य आरोपी कपिल जायसवाल ने स्वीकार किया कि उसका रद्द लाइसेंस, जीएसटी नंबर और मार्ग सॉफ्टवेयर की आईडी-पासवर्ड कर्ज के बदले दूसरों द्वारा इस्तेमाल किए जाते थे। उसे इसके एवज में तीन से आठ फीसदी तक नकद कमीशन मिलता था।
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इन पर हुई है एफआईआर
औषधि विभाग ने कपिल जायसवाल (शिव शक्ति मेडिकल) को मुख्य आरोपी बनाया है। हरमीत सिंह (मीत एंटरप्राइजेज), प्रियांशु पाल (विद्या फार्म), साहिल जैदी (आरएन फार्मा) और आबिद अली अतहर भी आरोपी हैं।
डिजिटल साक्ष्य और जांच
एफएसडीआई ने विद्या फार्म के लैपटॉप को कब्जे में लेकर जांच कराई। इसमें टेल्मा दवाओं के रिकॉर्ड मिले और उनकी बैच हिस्ट्री डिलीट करने के साक्ष्य भी सामने आए। निरीक्षण के दौरान विद्या फार्म में कोई दवा भंडारण नहीं मिला। आरएन फार्मा बंद मिली, जिसे सील किया गया। जीएसटी रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेज की भी पड़ताल की गई।
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