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आशियाना में बिल्डर कंपनी के खिलाफ केस दर्ज, विधिक अधिकारी बोले- हो चुका है समझौता

Sat, 27 Jun 2020 04:44 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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रियल एस्टेट कंपनी प्रताप हाइट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक वीरेंद्र प्रताप सिंह ने लखनऊ के आशियाना थाने में ओमेक्स कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों पर धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज कराया है। इंस्पेक्टर संजय राय ने बताया कि एफआईआर कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई है। वीरेंद्र का आरोप है कि ओमेक्स कंपनी ने उन्हें जो प्लॉट बेचा था, उस पर पहले से ही लोन ले रखा था।
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इस पर कंपनी के अधिकारियों ने संपर्क किया तो उन्होंने रुपया लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी रुपया नहीं दिया। उधर, ओमेक्स कंपनी के विधिक अधिकारी के मुताबिक वीरेंद्र प्रताप सिंह से 28 फरवरी को ही थाने में समझौता हो चुका है और वह ढाई करोड़ रुपये के प्लॉट के बदले कंपनी से तीन करोड़ रुपये ले चुके हैं।

इंस्पेक्टर ने बताया कि वीरेंद्र प्रताप सिंह आशियाना के कानपुर रोड स्थित एलडीए कॉलोनी सेक्टर आई में रहते हैं। उन्होंने मोनार्क विलेज प्राइवेट लिमिटेड, ओमेक्स लिमिटेड व जेआरएस प्रो प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ ठगी का आरोप लगाया है। वीरेंद्र का कहना है कि तीनों कंपनियों के नाम से सरोजनीनगर के औरंगाबाद खालसा में काफी जमीन है।
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यहां कंपनी के अधिकारियों से बातचीत के बाद उन्होंने 6000 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से करीब ढाई करोड़ रुपये में प्लॉट खरीदा और सारी रकम का भुगतान भी कर दिया। 16 फरवरी 2019 को प्लॉट का बैनामा हो गया। वीरेंद्र का कहना है कि उन्होंने प्लाॅट पर निर्माण के लिए कोटक महिंद्रा बैंक में लोन के लिए आवेदन किया।
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तीन माह में गलती सुधारने का किया वादा

इस दौरान पता चला कि उक्त प्लाट पर कंपनी के नाम से 11 अक्तूबर 2018 को जम्मू कश्मीर बैंक नई दिल्ली से एक लोन चल रहा है। इस पर बात की कंपनी के अधिकारियों ने पैसा लौटाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन लौटाया नहीं। आशियाना पुलिस ने शिकायत नहीं सुनी तो कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया, वहां से एफआईआर दर्ज करने का आदेश हुआ।

उधर, इस बारे में ओमेक्स कंपनी के लखनऊ में विधिक अधिकारी ने बताया कि जो प्लॉट वीरेंद्र को बेचा गया था, उस पर लोन चल रहा था। यह गलती मानी गई और उसे सुधारने के लिए कार्रवाई शुरू की गई। इस बीच 28 फरवरी 2020 को वीरेंद्र व कंपनी के बीच थाने में लिखित समझौता हुआ।

कंपनी ने प्लॉट की कीमत के बदले तीन करोड़ रुपये की सिक्योरिटी दी और तीन माह में गलती सुधारने का वादा किया। इसके बाद लॉकडाउन होने से कोर्ट व बैंकिंग के काम बंद हो गए। लॉकडाउन बाद समाधान करने को कहा था, लेकिन वीरेंद्र ने समझौते की बात छिपा केस दर्ज करा दिया।
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