रायबरेली। हिमाचल प्रदेश की पांच दवा कंपनियों के साथ ही पांच मेडिकल स्टोर संचालकों पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट में मुकदमा कायम किया गया है। विधि विश्लेषक प्रयोगशाला की जांच में दवाओं के नमूने अधोमानक मिलने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर शिवेंद्र प्रताप सिंह ने यह कार्रवाई की है। संबंधित दवा कंपनियों व दवा विक्रेताओं पर जुर्माने के साथ मुकदमों में सजा का भी प्रावधान है।
पिछले साल ड्रग इंस्पेक्टर ने शिवम मेडिकल स्टोर बछरावां से कैक्सीटॉल-200, श्याम मेडिकल स्टोर धरई से कोडरेक्स-डीएक्स, शहर स्थित गीतांजलि मेडिकल स्टोर से मेस्टोफोर-200, नवीन मेडिकल स्टोर सलोन से रोसूसिन-10 और अंशिका मेडिकल स्टोर छजलापुर से नॉरफ्लाक्स-200 का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था।
प्रयोगशाला की जांच में पांचों दवाओं के नमूने अधोमानक पाए गए। रिपोर्ट आने के बाद दवा बनाने वाली हिमाचल प्रदेश की कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था।
ड्रग इंस्पेक्टर ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद संबंधितों के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा कायम कर दिया है। कैक्सीटॉल-200 के निर्माता नक्सकेम बायोटेक व विक्रेता शिवम मेडिकल स्टोर, कोडरेक्स-डीएक्स के निर्माता मानीटर्स ब्राउन व विक्रेता श्याम मेडिकल स्टोर, मेस्टोफोर-200 के निर्माता एथेंस लाइफ साइसेंस व विक्रेता गीतांजलि मेडिकल स्टोर, रोसूसिन-10 के निर्माता नेक्सरिन बायोटेक व विक्रेता नवीन मेडिकल स्टोर और नॉरफ्लाक्स-200 के निर्माता पेंटाकेस फॉर्मास्युटिकल्स व विक्रेता अंशिका मेडिकल स्टोर पर मुकदमा कायम किया गया है।