भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने 31 कार्मिकों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी है। इन कार्मिकों के खिलाफ उपभोक्ताओं के उत्पीड़न व भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच लंबित है। प्रबंधन ने ऐसे मामलों में समयबद्ध तरीके से कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जांच को जानबूझ कर दबाने या सतर्कता जांच को लटकाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर प्रमुख सचिव ऊर्जा व पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार ने इन कार्मिकों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे दी है। वे गुरुवार को विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देशों के अनुसार विभाग में चल रही जांचों को समयबद्ध तरीके से पूरा करके दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पावर कॉर्पोरेशन ने करंट से मौत, बिलों में हेराफेरी, आय से अधिक संपत्ति, घूस लेने, सामानों का ब्योरा गलत दर्ज करना, बिजली चोरी कराना और लापरवाही बरतने में दोषी पाए गए इन कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई।
प्रमुख सचिव ने कहा ऊर्जा मंत्री के निर्देश हैं कि विभागीय कार्य में पारदर्शिता व उपभोक्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण हर हाल में हो। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भ्रष्टाचार की शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।