तीमारदारों का कहना है कि वेंटिलेटर व मुकम्मल इलाज के लिए पहले खुद गुहार लगाई, फिर बीजेपी के एक विधायक से भी फोन कराया, मगर अफसरों ने अनसुना कर दिया। अगर वे सुन लेते तो अनीता की जान बच जाती। पीड़ित परिवार मामले की शिकायत सीएम से करने की बात कहकर शव लेकर चले गए।
बलरामपुर की अनीता को ब्रेन हैमरेज हुआ था। तीमारदार गंभीर हालत में उसे केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाए थे। डॉक्टर जांच के लिए दौड़ाते रहे और उसे बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। तीमारदारों ने सोमवार रात उसे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया।
महिला की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोेर्ट पर रखने के लिए फाइल पर लिखा था। पति जगदम्बा अफसर और डॉक्टरों के आगे वेंटिलेटर देने के लिए बुधवार को गुहार लगाता रहा, मगर नहीं मिला। दोपहर बाद अनीता की मौत हो गई। पति का कहना है कि आईसीयू में वेंटिलेटर खाली पड़े थे।
बलरामपुर अस्पताल में सीधे भर्ती होने वाले अति गंभीर मरीजों को सिर्फ वेंटिलेटर की सुविधा मुहैया कराई जाती है। केजीएमयू से भेजे गए अति गंभीर मरीजों को यह सुविधा नहीं दी जाती है। निदेशक डॉ. राजीव लोचन का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को वेंटिलेटर दिया जाता है।
चार वेेंटिलेटर में दो खाली
बलरामपुर अस्पताल के आईसीयू में चार वेंटिलेटर हैं। बुधवार को दो वेंटिलेटर पर मरीज भर्ती थे, जबकि दो खाली थे। तीमारदार जगदम्बा का कहना है कि वह सुबह से आईसीयू व निदेशक कार्यालय के चक्कर लगाता रहा मगर वेंटिलेटर नहीं दिया गया।
दो वेंटिलेटर पर ही भर्ती थे मरीज
मुझे दो वेंटिलेटर पर मरीज भर्ती होने की जानकारी है। जो लोग इलाज कर रहे थे, वे जानें कि मरीज को वेटिंलेटर की जरूरत थी कि नहीं। - डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर