लखनऊ गोमती नगर के सेंट जोजफ अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती महिला की जांच में उसके पेट में रुई का टुकड़ा नजर आया। इसके बाद डांक्टरों ने दोबारा सर्जरी कर उसकी जान बचाई है। सेंट जोजफ हॉस्पिटल के चिकित्सों के अनुसार, सिटी स्कैन जांच में महिला के पेट में रुई का टुकड़ा देखकर वह दंग रह गए।
इसके बाद आनन-फानन उसकी सर्जरी प्लान की गई। वहीं परिवारीजनों का आरोप है कि इससे पूर्व उन्होंने फैजाबाद के एक निजी अस्पताल में मरीज को भर्ती कराया था, जहां आपरेशन के दौरान डॉक्टर ने रुई का टुकड़ा छोड़कर पेट में टांके लगा दिए थे। इसके कुछ दिन बाद ही संक्रमण होने से हालत बिगड़ गई।
मामले का खुलासा होने पर परिवारीजनों ने सीएमओ से शिकायत की , जिसके बाद जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। बस्ती गौरा पांडेयगंज निवासी संतोष पांडेय ने बताया कि उनकी पत्नी मधुलिका (26) की बच्चेदानी की ट्यूब फट गई थी। इस पर आनन-फानन एक अक्तूबर को मरीज को फैजाबाद के लोकप्रिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आरोप है यहां डॉक्टर प्रियंका खरे ने ऑपरेशन किया। परिवारीजनों की मानें तो ऑपरेशन के दौरान मधुलिका के पेट में रुई का बड़ा टुकड़ा छोड़कर डॉक्टर ने टांके लगा दिए। कुछ दिन बीतने बाद मधुलिका के पेट में दर्द हुआ तो वह फिर डॉ. प्रियंका खरे के पास पहुंची। इस पर डॉक्टर ने दवा लिख दी मगर कोई फायदा नहीं हुआ। संक्रमण की वजह से मधुलिका को असहनीय दर्द शुरू हो गया।
निजी अस्पताल ने एक लाख रुपये वसूले
मरीज मधुलिका
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संतोष ने बताया कि फायदा नहीं होने पर उन्होंने बीते मंगलवार को गोमतीनगर स्थित सेंट जोजफ हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराया। यहां सिटी स्कैन में पेट में रुई का टुकड़ा पड़ा होने की बात सामने आई। इसके बाद डॉक्टर निखिल ने ऑपरेशन करके उसे निकाल दिया। करीब पांच दिन तक आईसीयू में भर्ती रहने के बाद उसे सोमवार को वार्ड में शिफ्ट किया गया।
इस मामले में पति ने फैजाबाद सीएमओ डॉ एके गुप्ता से शिकायत की है, वहीं, निजी अस्पताल के संचालक ने बताया कि मरीज के पेट में रुई छूटने के बारे में जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। सीएमओ फैजाबाद डॉ.एके गुप्ता ने बताया कि तीमारदार संतोष की शिकायत पर मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
तीन सदस्यीय कमेटी जांच कर रही है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। पति संतोष का आरोप है कि लोकप्रिया अस्पताल में बच्चेदानी के ऑपरेशन दौरान करीब एक लाख रुपये वसूले गए। जब मरीज की हालत गंभीर होने जब अस्पताल गए तो डॉक्टरों ने वापस कर दिया। वहीं, लखनऊ में दोबारा ऑपरेशन कराने में भी मोटी रकम खर्च हो गई।