लखनऊ में लोहिया संस्थान के डॉक्टरों-स्टाफ की संवेदनहीनता ने मंगलवार को एक मरीज की जान ले ली। इमरजेंसी में लाया गया कैंसर मरीज तड़प-तड़प कर मर गया, वहीं डॉक्टर-स्टाफ मोबाइल पर गेम खेलते रहे। बड़ी मुश्किल से तीमारदार मरीज को लेकर अंदर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इससे नाराज तीमारदारों ने करीब आधे घंटे तक हंगामा किया। अधिकारियों ने मामला शांत कराया। तीमारदारों ने शासन में शिकायत की है। बहराइच के कैसरगंज का अमरेश बहादुर सिंह (38) कैंसर से पीड़ित था।
उसका इलाज लोहिया संस्थान के डॉ. गौरव गुप्ता से चल रह था। तीमारदार संजय सिंह ने बताया कि मरीज की तीन कीमोथेरेपी हो चुकी थी। सोमवार को हल्का बुखार होने पर अमरेश को ओपीडी में लाया गया। जांच कराकर उसे वापस घर लेकर चले गए।
मंगलवार दोपहर अचानक अमरेश की हालत बिगड़ने लगी और उसे नींद के झोंके आने लगे। शाम करीब साढ़े चार बजे आनन-फानन परिवारीजन उसे लेकर लोहिया की इमरजेंसी पहुंचे। वहां अमरेश को अंदर ले जाने के लिए व्हीलचेयर या स्ट्रेचर नहीं मिली।