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अपनी जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने लाश के साथ किया ये...

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सिविल अस्पताल में भर्ती महिला की हालत बिगड़ने पर बेटा डॉक्टर से मिन्नते करता रहा लेकिन वह संवेदनहीन बना रहा और वक्त पर इलाज न मिलने से मरीज की मौत हो गई।
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परिवारीजनों का आरोप था कि मरीज के इलाज में शुरू से ही लापरवाही बरती गई। वहीं इस मामले में प्रमुख्ा सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं।

प्रतापगढ़ निवासी मेराज की मां अनवरी बेगम (50) कुछ दिन पहले रिक्शे से गिरकर चोटिल हो गई थीं। मेराज ने बताया कि 20 मई को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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फिजिशियन डॉक्टर सिर्फ दवा देकर काम चलाते रहे। शुक्रवार सुबह हालत बिगड़ी तो राउंड पर आए डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड और खून की जांच लिख दी।
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इधर से उधर भटकता रहा बेटा

दोपहर दो बजे अचानक हालत बिगड़ी और वो बेहोश हो गईं। हालत खराब होते देख इमरजेंसी आउटडोर ड्यूटी में तैनात डॉक्टर के पास पहुंचे तो उसने कहा कि पहले सिस्टर से ऑनकॉल बुलाने के लिए कहो।

इस बीच सिस्टर ने इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद वापस वार्ड में गए तो अनवरी बेगम की सांसें थम चुकी थीं। इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने दिखावे के लिए ऑक्सीजन और ग्लूकोज की बोतल लगा दी।

कुछ देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो परिवारीजनों ने सांस न चलते देख रोना शुरू कर दिया। इमरजेंसी में चीख सुन डॉक्टर दोबारा मौके पर पहुंचा और मौत की जानकारी दी।
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