रायबरेली। जिले के रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रेलवे ट्रैक की क्षमता परखने के लिए शनिवार को ओएमएस (ऑसीलेशन मॉनीटरिंग सिस्टम) स्पेशल दौड़ाई गई। इसमें लगी मशीनें ट्रैक की गुणवत्ता के साथ उसकी खामियों का भी पता लगाती है। यह एक तरह का स्पीड ट्रायल था, जिसके जरिए क्षमता बढ़ाने की रूपरेखा तय की जाएगी।
लखनऊ से आई ओएमएस स्पेशल ने दोपहर में दरियापुर स्टेशन पर स्पीड ट्रायल शुरू किया। यह गाड़ी उबरनी होते हुए डलमऊ पहुंची और लालगंज तक गई। लालगंज से वापस डलमऊ लौटी और कुछ देर रुकने के बाद रूपरेखा तैयार की। इसके बाद डलमऊ से ऊंचाहार तक स्पीड ट्रायल लिया। देर शाम स्पेशल लखनऊ लौट गई।
रेलवे के सहायक मंडल अभियंता-उन्नाव सुनील कुमार गंगवार के नेतृत्व में यह स्पीड ट्रायल किया गया। जिसमें स्थानीय स्तर पर यातायात निरीक्षक बाल मुकुंद, लोको इंस्पेक्टर पीके सिंह, रेल पथ निरीक्षक राकेश कुमार के साथ ही लखनऊ से आए अधिकारी शामिल रहे।
स्पीड ट्रायल लेने वाली टीम में शामिल अधिकारियों के अनुसार ओएमएस स्पेशल दौड़ाने का मकसद ट्रैक की गुणवत्ता परखना था। जिससे भविष्य में इस ट्रैक की खामियां दूर कर क्षमता बढ़ाई जा सके। वर्तमान में दरियापुर-उबरनी-डलमऊ रेलमार्ग की गति सीमा 45 किमी. प्रति घंटा है, जबकि डलमऊ-लालगंज रेलखंड में 110 किमी. प्रति घंटा और डलमऊ-ऊंचाहार रेलखंड में 75 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ सकती हैं। भविष्य में पूरे रेलखंड की क्षमता 110 किमी. प्रति घंटा तक करने की संभावना है।