रायबरेली। जिले में गर्मी और और बरसात के समय बिजली की मांग बढ़ने पर अब उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। इस समस्या से राहत दिलाने के लिए 20 विद्युत उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इस कार्य में करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार ने रिवैंप डिस्टीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) शुरू की है। योजना के तहत जर्जर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना है। योजना के तहत 20 विद्युत उपकेंद्रों को चिन्हित किया गया है। इन उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। मौजूदा समय में किसी उपकेंद्र की क्षमता 10 एमवीए, तो किसी की 15 एमवीए की क्षमता है।
सर्दी में बिजली आपूर्ति तो बेहतर रहती है, लेकिन गर्मी और बरसात के समय बिजली की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान जिले के पांच लाख उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ता है। समस्या से राहत दिलाने के लिए चयनित विद्युत उपकेंद्रों में पांच एमवीए की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
इन उपकेंद्रों की बढ़ेगी क्षमता
पावर कॉर्पोरेशन की ओर से उन विद्युत उपकेंद्रों को चिन्हित किया गया है, जहां पर गर्मी में अधिक बिजली की मांग रहती है। रोहनिया, डीह, करहिया बाजार, रसूलपुर, बरस, कलुवाखेड़ा, सलोन तहसील, आचार्य द्विवेदी नगर, प्रगतिपुरम, तेलियाकोट, अमावां, रहवां, ताला, अटौरा, दरीबा, पोरई, सिधौना, विशुनपुर, ओसाह, चंदापुर विद्युत उपकेंद्र की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
क्षमता बढ़ने से मिलेगी भरपूर बिजली
जिले के 20 विद्युत उपकेंद्रों को क्षमता वृद्धि के लिए चिन्हित किया गया है। इनको आरडीएसएस योजना
में शामिल किया गया है। क्षमता बढ़ने से उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा।
- आरएस सरोज, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल प्रथम