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GOOD NEWS: आसान और सस्ती होगी कैंसर की जांच

Fri, 02 Jan 2015 12:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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राजधानी में कैंसर की जांच जल्द ही और आसान व सस्ती हो जाएगी। संजय गांधी पीजीआई में स्थापित साइक्लोट्रॉन मशीन शुरू करने की तैयारी हो गई है।
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पेट स्कैन से कैंसर की जांच के लिए साइक्लोट्रॉन मशीन से रेडियो एक्टिव मैटेरियल तैयार किया जाता है। अभी ये मैटेरियल मुंबई से हवाई जहाज से मंगाया जाता है।

साइक्लोट्रॉन मशीन से इस मैटेरियल को पीजीआई में ही बनाया जा सकेगा। इससे पीजीआई को तो फायदा होगा ही लोहिया इंस्टीट्यूट में भी पेट स्कैन के लिए रेडियो एक्टिव मैटेरियल दिया जा सकेगा।
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एसजीपीजीआई में स्थापित साइक्लोट्रॉन मशीन से जल्दी ही कैंसर रोगियों की जांच के लिए जरूरी रेडियो एक्टिव पदार्थ (आईसोटोप) बनाया जाएगा। मशीन का ट्रायल हो चुका है। एईआरबी (एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड) और बार्क (भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर) की टीम की मौजूदगी में मशीन का ट्रॉयल भी हो चुका है।

अब लाइसेंस लेने की कागजी कार्रवाई चल रही है। इसके लिए एईआरबी और बार्क की टीम एक बार और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग का निरीक्षण करेगी। इसके बाद एसजीपीजीआई को आईसोटोप बनाने का लाइसेंस मिल जाएगा।

जिससे पेट स्कैन के जांच शुल्क में कुछ कमी आएगी। वर्तमान में एक बार की जांच का शुल्क 9500 रुपये है। मुंबई से आईसोटोप लाने का खर्च बचने की स्थिति में जांच शुल्क में कमी भी की जा सकती है।
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कई साल से डिब्बे में बंद थी मशीन

वर्ष 2011 में आयी साइक्लोट्रॉन मशीन लगभग डेढ़ साल तक डिब्बे में ही बंद थी क्योंकि पहले इसके लिए अंडरग्राउंड बंकर नहीं बना था।

मशीन की आपूर्ति करने वाली गुजरात आइसोटोप कंपनी ने बंकर निर्माण की कोई गाइड लाइन नहीं तैयार की थी। इसके बाद कई साल तक बंकर ही नहीं बन पाया।

लगभग डेढ़ साल पहले मशीन की जरूरत के अनुसार मानकों को ध्यान में रखते हुए बंकर का निर्माण पूरा कराया गया और मशीन स्थापित की गई।

मशीन खुलने पर पता चला कि लगभग एक करोड़ रुपये की कीमत के सबसे महत्वपूर्ण रेडिएशन मॉनीटर और सेकेंडरी कूलिंग सिस्टम की कंपनी ने आपूर्ति ही नहीं की। इन उपकरणों के बगैर इस मशीन को चलाया ही नहीं जा सकता था। इसके बाद उपकरणों की कमी को पूरा किया गया।

एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. राकेश कपूर का कहना है, लाइसेंस की प्रक्रिया इसी महीने पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद साइक्लोट्रॉन मशीन चालू हो जाएगी। रेडियो एक्टिव आईसोटोप बनाने की प्रक्रिया काफी संवेदनशील है। एईआरबी की टीम की मौजूदगी में मशीन का ट्रायल भी हो चुका है।
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