विवि के शिक्षकों को वेतन राज्य सरकार के अनुदान से मिलता है। इसलिए शिक्षकों के पद पर राज्य सरकार का नियंत्रण रहता है। पिछले 20 साल में विवि में कई नए कोर्स और विभाग तो खुल गए, लेकिन एक भी नियमित पद नहीं मिला है।
इस वजह से विवि के नए विभाग नियमित शिक्षक के बिना ही चल रहे हैं। शिक्षक न होने की वजह से इन विभागों में पढ़ाई तो प्रभावित होती ही है। साथ ही पीएचडी के लिए स्टूडेंट्स को कॉलेजों का मुंह ताकना पड़ रहा है।