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एक से दूसरे विश्वविद्यालय में ट्रांसफर ले सकेंगे विद्यार्थी, डिग्री लेने में नहीं होगी कोई दिक्कत

Fri, 12 Feb 2021 02:38 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा - फोटो : amar ujala
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प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत क्रेडिट हस्तांतरण व्यवस्था लागू की जाएगी। नए पाठ्यक्रम के तहत विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश लेकर उसे छोड़ा जा सकता है और बाद में फिर उसे पूरा किया जा सकता है। एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज, एक विश्वविद्यालय से दूसरे  विश्वविद्यालय में बिना किसी दिक्कत के क्रेडिट ट्रांसफर के जरिये स्थानांतरित होकर अपनी डिग्री ले सकेंगे।
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उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि क्रेडिट हस्तांतरण की सुविधा लागू करने के लिए अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम समिति का गठन किया गया था। उच्च शिक्षा विभाग ने विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम वेबसाइट पर अपलोड कर 20 फरवरी तक उन पर सुझाव मांगे हैं। विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम 30 फीसदी तक परिवर्तन कर जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र 2021-22 से लागू करना होगा। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रथम फेज में स्नातक स्तर के कला एवं मानविकी के 16, भाषा के चार, विज्ञान के 09, वाणिज्य, बीएड एवं प्रबंधन के सभी विषयों के साथ-साथ 6 अनिवार्य विषयों के पाठ्यक्रम भी वेबसाइट पर अपलोड किए हैं।

नए पाठ्यक्रम में खास... ग्रेजुएशन में तीसरा विषय दूसरे संकाय का चुनना होगा

उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस. गर्ग ने बताया कि नया पाठ्यक्रम लागू होने के बाद उच्च शिक्षा कार्यक्रम के पहले वर्ष में विद्यार्थियों को अपने संकाय के दो मुख्य विषयों को चुनना होगा। इसके लिए संकाय विशेष के संदर्भ में पूर्व पात्रता की आवश्यकता होगी। दो प्रमुख विषयों के अलावा हर सेमेस्टर में किसी भी अन्य संकाय के एक और मुख्य विषय का चुनाव करना होगा। साथ ही किसी अन्य संकाय से एक गौण विषय के रूप में व्यावसायिक पाठ्यक्रम (अपनी अभिरूचि के अनुसार) तथा एक अनिवार्य सह-शैक्षणिक पाठ्यक्रम का चयन करना होगा। विद्यार्थी बहु-विषयक मेजर एवं माइनर  विषयों के साथ साथ ऐच्छिक एवं अनिवार्य विषय का अध्ययन करेंगे।

भारतीय ज्ञान परंपरा को प्राथमिकता

मोनिका एस.गर्ग ने बताया कि सभी विषयों की पहली यूनिट में पहला पाठ संबंधित विषय की भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित रखा गया है। विद्यार्थियों को सर्वांगीण विकास के लिए मुख्य विषय के साथ-साथ रोजगार परक पाठ्यक्रम तथा अनिवार्य विषय, मानवीय मूल्य एवं सतत् विकास, स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता, डिजिटल जागरूकता, व्यक्तित्व विकास, कम्युनिकेशन स्किल का भी अध्ययन करना होगा।

प्रैक्टिकल पर फोकस
नए पाठयक्रम में गैर-प्रायोगिक विषयों में भी व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रैक्टिकल जोड़ा गया है। भाषाओं के पाठ्यक्रम में अनुवाद, रूपांतरण, स्क्रिप्ट राइटिंग, फोनिक्स, अनुवाद, लैंग्वेज लैब को शामिल किया जाएगा। शोध को बढ़ावा देने के लिए स्नातक प्रथम वर्ष से ही सभी विषयों में रिसर्च ओरियंटेशन को जोड़ा गया है। स्नातक तृतीय वर्ष में रिसर्च प्रोजेक्ट को भी जोड़ा गया है। अपनी भाषा में शोध कार्यों को प्रोत्साहन देने के लिए शोध कार्य से संबंधित भाग में थ्योरी एवं प्रैक्टिकल को समान महत्व दिया गया है।
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तीन वर्ष में सह शैक्षणिक पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे

स्नातक के पहले तीन वर्षों में अपनी पसंद के अनुसार 6 सह-शैक्षणिक पाठ्यक्रम पूर्ण करने होंगे। प्रत्येक पाठ्यक्रम दो क्रेडिट के होंगे।
एक सेमेस्टर में कम से कम 15 सप्ताह होंगे, जिसमें कम से कम 90 शिक्षण दिवस होंगे। प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम उत्तीर्ण प्रतिशत होगा जो विश्वविद्यालय शैक्षणिक परिषद द्वारा तय किया जाएगा।
प्रत्येक पेपर उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम अंक होंगे। उपाधि प्राप्त करने के लिए न्यूनतम क्रेडिट जरूरी होगा। जैसे कि एक वर्षीय प्रमाण पत्र  के लिए न्यूनतम 46 क्रेडिट, दो वर्षीय डिप्लोमा के लिए न्यूनतम 92 क्रेडिट  तथा स्नातक डिग्री के लिए 138 क्रेडिट प्राप्त करने होंगे।
मूल्यांकन में 75 प्रतिशत विश्वविद्यालय की परीक्षा और 25 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन से तय होगा। वर्ष के अंत में परिणाम मेजर, माइनर, व्यावसायिक एवं सह-शैक्षणिक सभी प्रकार के पाठ्यक्रम पर आधारित होगा। सभी पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करना आवश्यक है।
अंतिम परिणाम ग्रेड के आधार पर होगा। हालांकि वर्ष के अंत में उपाधि के लिए कुल अर्जित क्रेडिट में कुछ क्रेडिट की छूट होगी।
 
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