लखनऊ विश्वविद्यालय कॉलेजों को मान्यता देते समय सारे मानक जांचता है। पर, जब बारी खुद की आती है तो फिर वही मानक पूरे नहीं करता। विवि में गृह विज्ञान, भूगोल, और ज्योतिर्विज्ञान जैसे कई विभाग हैं जिनमें आज तक नियमित शिक्षक ही नहीं हैं।
जबकि पिछले 20 बरसों से ये विभाग चल रहे हैं और इस दौरान कई बार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया चल चुकी है। नियमित शिक्षक नहीं होने से इन विभागों मेें पढ़ाई तो प्रभावित हो ही रही है साथ ही पीएचडी के लिए विद्यार्थियों को कॉलेेजों का मुंह ताकना पड़ रहा है।
विवि के मानकों के अनुसार किसी भी विभाग को चलाने के लिए कम से कम दो शिक्षक होने चाहिए। इसलिए किसी भी कॉलेज को मान्यता देने से पहले विवि वहां का स्थलीय निरीक्षण करता है। निरीक्षण के दौरान कॉलेज का भवन और अन्य मानक देखे जाते हैं।
कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति का अनुमोदन विवि उनके सभी प्रमाणपत्र जांचकर इंटरव्यू करके ही करता है। यह प्रक्रिया केवल वित्तविहीन कॉलेजों के लिए ही है। विवि ने अपने यहां खुद के विभागों में अभी तक शिक्षकों की नियमित नियुक्ति नहीं की है। विवि कॉन्ट्रैक्ट और गेस्ट लेक्चर के सहारे पढ़ाई कराने का दावा कर रहा है, पर नियमित शिक्षकों की कमी पूरा करना कहीं से संभव नहीं है।