लखनऊ विश्वविद्यालय ने दाखिले में देरी होने की वजह से परास्नातक स्तर पर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को शामिल कर लिया है। इस समय स्नातक स्तर पर इसे लागू करने की तैयारी चल रही है। स्नातक में विद्यार्थियों की संख्या परास्नातक की तुलना में बेहद ज्यादा है।
अगले सत्र से चार अन्य जनपदों के कॉलेज भी लखनऊ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से पढ़ाई करेंगे। ऐसे में स्नातक स्तर पर विद्यार्थियों की कुल संख्या करीब ढाई लाख हो सकती है। स्नातक स्तर पर जो भी बदलाव होंगे वे सभी विद्यार्थियों पर लागू होंगे। इसलिए लविवि इस पर भी ध्यान दे रहा है कि प्रावधान नई शिक्षा नीति के हिसाब से होने के साथ ही व्यवहारिक भी होने चाहिए, ताकि उन्हें आसानी से लागू किया जा सके।
लखनऊ विश्वविद्यालय करेगा दूसरे संस्थानों की मदद
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अलोक कुमार का कहना है कि पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश की टीम ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर मुलाकात की और यहां लागू प्रावधानों पर चचा की। लविवि परास्नातक स्तर पर मल्टी एग्जिट की सुविधा देने वाला देश का पहला विवि बन गया है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम अन्य संस्थानों को नई शिक्षा नीति लागू करने में मदद करें।