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लखनऊ यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की भी पढ़ाई कर सकेंगे स्टूडेंट्स

Mon, 09 Jan 2017 03:22 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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लखनऊ य‌ूनिवर्सिटी - फोटो : demo pic
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लखनऊ विश्वविद्यालय ने परंपरागत और प्रबंधन पाठ्यक्रमों के साथ ही तकनीकी पाठ्यक्रम पढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अगले शैक्षिक सत्र से एलयू इंजीनियरिंग संकाय की शुरुआत करेगा।
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इसके तहत विवि में इंजीनियरिंग पढ़ाई जाएगी। साथ ही कॉलेजों को सहयुक्तता भी दी जाएगी। राजधानी के ज्यादातर विवि में परंपरागत के साथ ही प्रबंधन और तकनीकी पाठ्यक्रम भी पढ़ाए जाते हैं।

इसे देखते हुए एलयू ने भी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। विवि के कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि  तकनीकी शिक्षा के प्रति स्टूडेंट्स के बढ़ते रुख को देखकर यह फैसला किया गया है।
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आज के समय में स्टूडेंट डिग्री के साथ ही प्लेसमेंट की सुविधा भी चाहता है। बीए और एमए जैसे पाठ्यक्रमों में प्लेसमेंट की संभावना कम होती है। दूसरी ओर मैनेजमेंट, वोकेशनल और तकनीकी पाठ्यक्रमों की डिग्री के बाद प्लसेमेंट की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है।

यही वजह है कि परंपरागत पाठ्यक्रमों में सीट खाली रहती हैं। उनके अनुसार स्टूडेंट्स को जब तक प्लेसमेंट की सुविधा नहीं मिलेगी वे कोर्स की ओर आकर्षित नहीं होंगे। इसी प्रयास के तहत विवि में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।

लखनऊ में इस समय एकेटीयू और निजी विश्वविद्यालयों के साथ ही बीबीएयू, पुनर्वास विवि में भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है। ऐसे में नामी संस्थानों में केवल लखनऊ विश्वविद्यालय ही बच रहा था, जहां पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं हो रही है।
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कॉलेजों को दोहरी संबद्धता से मिलेगी मुक्ति

डेमो - फोटो : demo pic
एलयू इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों का सिलेबस इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से तैयार करेगा। कुलपति के अनुसार, कई बार ऐसा होता है कि  स्टूडेंट जो क्लास में पढ़ता है, जॉब में उसकी जरूरत ही नहीं होती।

इसके बजाय उसे दोबारा ट्रेनिंग करनी होती है। इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि स्टूडेंट को जो पढ़ाया जाए, वह उसका उपयोग अपनी नौकरी में भी करे।

इसलिए सिलेबस डिजाइन में इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। स्टूडेंट भी इसमें अपनी भागीदारी देंगे। शासनादेश के अनुसार, लखनऊ विवि पूरे जनपद में कॉलेजों को सहयुक्तता दे सकता है।

विवि में इंजीनियरिंग संकाय नहीं है। ऐसे में बहुत से कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने परंपरागत पाठ्यक्रमों की सहयुक्तता एलयू से तथा तकनीकी संस्थानों की संबद्धता एकेटीयू से ले रखी है।

इस वजह से कॉलेजों को दो विवि से संपर्क करना होता है। एडमिशन, परीक्षा फॉर्म, परीक्षा और डिग्री संबंधी कामों के लिए कॉलेजों को दोहरी ऊर्जा लगानी होती है। संबद्धता एक ही जगह से होने पर उन्हें हर काम में आसानी होगी।

 
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आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी

डेमो - फोटो : demo pic
विवि से सहयुक्त ज्यादातर कॉलेज परंपरागत के बजाय तकनीकी पाठ्यक्रमों क ी ओर से रुख कर रहे हैं। परंपरागत पाठ्यक्रमों के बजाय इन पाठ्यक्रमों की फीस ज्यादा होती है।

​तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू होने से विवि और कॉलेजों में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम होने पर फीस ज्यादा मिलेगी। इससे विवि और कॉलेज दोनों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।

मौजूदा समय में लखनऊ विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट का स्तर बहुत खराब है। लखनऊ यूनिवर्सिटी मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (लुंबा) को छोड़ दें तो ज्यादातर विभग और संस्थानों का प्लेसमेंट बहुत अच्छा नहीं है।

इंजीनियरिंग कोर्स शुरू होने पर कम से कम एलयू में तो प्लेसमेंट का स्तर सुधरने की संभावना है। विवि में सेंट्रलाइज प्लेसमेंट सेल की स्थापना के लिए शासन से बजट भी मिल चुका है। इसलिए प्लेसमेंट बेहतर होने की संभावना और बढ़ सकती है।

विवि के न्यू कैंपस में इंजीनियरिंग पाठ्यकम शुरू किया जाएगा। स्टूडेंट्स उन कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं, जहां पर प्लेसमेंट की स्थिति ज्यादा अच्छी हो। इसलिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इससे हम स्टूडेंट्स को डिग्री के साथ ही प्लेसमेंट की सुविधा भी दे सकेंगे। - प्रो. एसपी सिंह कुलपति, लविवि
 
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