लविवि में वर्ष 1950 में नक्षत्रशाला की स्थापना हुई थी। उस समय किसी शैक्षणिक संस्था में स्थापित होने वाली यह पहली नक्षत्रशाला थी। यह काफी समय तक चालू हालत में थी और स्पेस साइंस के क्षेत्र में जाने वाले विद्यार्थियों के लिए प्लेटफॉर्म की तरह काम करती थी।
गणित एवं खगोल विज्ञान विभाग में प्रो. एएन सिंह के प्रयास से इसकी स्थापना हुई थी। यह प्रदेश की पहली तथा देश की कुछ नक्षत्रशालाओं में से एक थी। इसके माध्यम से यहां के विद्यार्थी नक्षत्र देखने और उन्हें पहचानने के साथ उनकी सटीक गणना करना भी सीखते थे।
वर्ष 1985 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 72वें संस्करण के दौरान यह नक्षत्रशात्रा चालू हालत में थी। इसके बाद बदहाली की मार से यह बंद पड़ी है। पिछले 70 साल के दौरान नक्षत्रशाला में प्रयोग की जाने वाली तकनीक और उपकरणों में काफी बदलाव आ चुका है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय का कहना है कि विभाग में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। खगोल विज्ञान को अलग विभाग बनाने का फैसला एकेडमिक काउंसिल कर सकती है। इसका प्रस्ताव उसके सामने रखा जाएगा। खगोल विज्ञान की बेहतरी के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।