प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ एक बार फिर से अभियान शुरू होगा। इसमें आबकारी विभाग व पुलिस के साथ एसटीएफ भी शामिल होगी। इस दौरान उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर में जहरीली शराब से हुए मौतों के बाद इसके कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि बड़े पैमाने पर अवैध शराब की बरामदगी के बावजूद सिर्फ कॅरिअर ही पकड़े जाते हैं। पुलिस इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती है कि शराब का मालिक कौन है। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल ऐसे 120 मामले चिह्नित किए गए, जिनमें 1000 लीटर या अधिक अवैध शराब बरामद हुई थी। ऐसे मामलों में अब पूरा कनेक्शन तलाशा जाएगा कि शराब कहां से कहां जा रही थी। इसके लिए एसटीएफ की मदद ली जाएगी। इस बाबत आबकारी विभाग और यूपी एसटीएफ के बीच बैठक हो चुकी है।
यूपी के मुकाबले हरियाणा में शराब सस्ती है। इसलिए हरियाणा में बनी शराब यूपी के रास्ते बिहार भेजी जाती है। यही शराब कई बार यूपी में पकड़ी जाती है। इसमें कॅरिअर ही पकड़े जाते हैं, जिन्हें यह नहीं पता होता है कि शराब किसने भेजी है और किसे डिलिवर होना है। सूत्रों का कहना है कि अवैध शराब के कारोबारी कोड वर्ड का इस्तेमाल करते हैं। जिससे किसी के पकड़े जाने पर कोई नाम न खुलने पाए।