सीडब्ल्यूसी की मेंबर मजिस्ट्रेट डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि मामला संदिग्ध लग रहा है। स्थानीय पार्षद या सभासद के सत्यापित करने के बाद ही बच्चों को सौंपा जाएगा। तब तक वे राजकीय शिशु गृह में रहेंगे। अभियान के पहले चरण में हजरतगंज, इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा, अवध हॉस्पिटल चौराहा, टेढ़ी पुलिया, पालीटेक्निक और इंदिरागांधी प्रतिष्ठान चौराहा चुना गया है।
सीडब्ल्यूसी सदस्य ने जब एक महिला ने पूछा, यह तुम्हारा बच्चा है तो इसका नाम बताओ तो उसने कहा- नहीं मालूम। वहीं, जब बच्चे से मां का नाम पूछा गया कि पहले उसने पार्वती फिर मालती कहा। पूछताछ का यह सिलसिला प्राग नारायण रोड स्थित चाइल्ड लाइन के ऑफिस में काफी देर तक चला।