लखनऊ। प्रतापगढ़ के सांगीपुर पीथापुर शाहवरी निवासी विष्णु यादव की हत्या के बाद आरोपी उनके शव को ठिकाने लगाना चाहते थे। मौके पर पुलिस पहुंची तो विष्णु के ससुर गेट खोलने के लिए तैयार नहीं थे। गेट तोड़कर पुलिस अंदर घुसी तब घटना का पता चला।
बुधवार को विष्णु के पिता छेदीलाल ने ससुर तीर्थराज, सास सरोज, चचिया ससुर यज्ञ नारायण सिंह, साली राधा, रत्ना, ज्योति और विधि के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इंस्पेक्टर आशियाना छत्रपाल सिंह ने बताया कि यज्ञ नारायण सिंह को छोड़कर सभी आरोपी हिरासत में हैं और पूछताछ की जा रही है।
विष्णु की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सिर पर चोट लगना आया है। सिर पर छह और बाकी शरीर पर चोट के छोटे-बड़े 18 घाव मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट इस बात की तरफ इशारा कर रही है कि आरोपियों ने विष्णु को तब तक पीटा जब तक उनकी मौत नहीं हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजन शव को प्रतापगढ़ लेकर चले गए।
तीर्थराज नहीं खोल रहा था दरवाजा, धक्का देकर अंदर घुसी पुलिस
मंगलवार रात विष्णु की हत्या की सूचना पर आशियाना पुलिस तीर्थराज के घर पहुंची तो गेट अंदर से बंद था। गेट खटखटाने पर तीर्थराज बाहर निकला पर उसने गेट नहीं खोला। पुलिस के पूछने पर उसने हत्या की सूचना को गलत बताया और मारपीट व आपसी झगड़े की बात बताकर गुमराह करने लगा। पुलिस बार-बार तीर्थराज से गेट खोलने के लिए कहती रही पर उसने गेट नहीं खोला। आखिरी में धक्का देकर पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई तो एक कमरे में विष्णु की पत्नी साक्षी रोती-बिलखती मिली। घर के पोर्च में खून से लथपथ विष्णु का शव पड़ा था। शव के ऊपर सफेद पन्नी पड़ी थी। आशंका है कि आरोपी देर रात मौका पाकर शव को ठिकाने लगाने की फिराक में थे।
मुकदमे में समझाैते के बहाने बुलाया था
विष्णु के घरवालों का आरोप है कि मुकदमे में बातचीत और समझौते के बहाने से विष्णु को ससुराल वालों ने घर बुलाया था। विष्णु के पिता छेदीलाल और भाई सुनील कुमार यादव ने बताया कि विष्णु और साक्षी के प्रेम विवाह से उसके ससुराल वाले नाराज थे। दोनों की कोर्ट मैरिज के बाद तीर्थराज ने विष्णु के खिलाफ आशियाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साक्षी के बयान के बाद केस खारिज हो गया था। मई 2024 में विष्णु छोटी साली को लेकर चला गया था। इस मामले में तीर्थराज ने आशियाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 12 मई 2024 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। 5 जून 2025 को वह जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आया था। मई 2024 में दर्ज हुए केस की एक-दो दिन में तारीख लगी थी। तीर्थराज व परिवार के लोगों ने विष्णु को उसी केस की बातचीत के बहाने से बुलाया था।
पत्नी को भी बनाया बंधक
विष्णु के घरवालों का यह भी आरोप है कि घटना के वक्त विष्णु की पत्नी साक्षी को कमरे में बंद कर बंधक बना लिया गया था। इसके बाद आरोपियों ने मिलकर विष्णु की हत्या कर दी। इंस्पेक्टर आशियाना छत्रपाल सिंह का कहना है कि पत्नी से बातचीत नहीं हो पाई है। इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
बेटे के जेल जाने से आहत मां की हो गई थी मौत
विष्णु के परिवार में पिता और तीन भाई हैं। पिता छेेदीलाल किसानी करते हैं। घरवालों के अनुसार विष्णु के जेल जाने के बाद से मां गुड़िया की तबीयत खराब रहने लगी। इसी गम में उनकी 21 जुलाई 2025 को मौत हो गई थी। विष्णु लखनऊ में प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। कुछ समय पहले प्रतापगढ़ जाकर नौकरी करने लगे। कुछ दिन पहले वह फिर से पत्नी व बेटी को लेकर लखनऊ आ गए और नौकरी जॉइन कर ली।