अक्सर पीक ऑवर्स यानी सुबह नौ से साढ़े दस बजे और शाम चार से छह बजे के बीच कॉल ड्रॉप या कॉल जंपिंग की समस्या कोई इत्तेफाक नहीं, इसके पीछे तकनीकी खराबी के साथ मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों की मनमानी भी बड़ी वजह मानी जा रही है।
सेवा प्रदाता ऑपरेटर मोबाइल स्विचिंग सेंटर के जरिये मोबाइल नंबरों को आपस में जोड़ने वाले नेटवर्क सिग्नल को पीक ऑवर में जानबूझ कर कमजोर कर कॉल ड्राप, कॉल जंपिंग व कॉल रिजेक्ट जैसी परेशानियां पैदा कर इसका फायदा अपनी कस्टमर संख्या बढ़ाने में उठाते हैं।
इस खेल में नुकसान रोजाना लाखों आम उपभोक्ताओं का होता है। बिना कॉल हुए बैलेंस कट जाता है। ट्राई के कड़े निर्देश बाद भी कमजोर नेटवर्क सिग्नल की आड़ में कॉल ड्रॉप से कस्टमरों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा।
मोबाइल ऑपरेटरों के सिग्नल रिसीव करने वाले बेस ट्रांस रिसीवर स्टेशन (बीटीएस) टावर का जोन बंटा होता है। एक से दूसरे जोन में जाने पर सिग्नल कमजोर हो सकते हैं, इसी दौरान कनेक्टिविटी की दिक्कत भी आती है।