रिपोर्ट में कहा गया कि अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की भारी कमी और ऑपरेशन थियेटर तक की सेवाओं में कमियां मिली हैं। ट्रॉमा सेंटर में सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। रोगियों को दिए जाने वाला भोजन भी अस्पतालों में अलग-अलग मिला। अग्निशमन इंतजाम भी काफी अपर्याप्त हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अभिलेखों के खराब रख-रखाव ने अंत: रोगी विभाग की जांच में बाधा उत्पन्न की। बांदा, बदायूं, गोरखपुर और सहारनपुर के जिला चिकित्सालय सुविधाओं की दृष्टि से काफी पीछेहैं।
रिपोर्ट में दवाओं की खरीद के लिए बनाई गई प्रणाली भी दोषपूर्ण मिली। दवाओं की आपूर्ति भी समय से नहीं की जा रही है। चिकित्सालयों में सफाई और लॉन्ड्री व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।
उपकरणों और मानव संसाधन की कमी के चलते डायग्नोस्टिक सेवाएं अपेक्षित स्तर की नहीं मिलीं। यह भी कहा गया कि नमूना जांच के लिए चयनित जिला चिकित्सालयों में ओपीडी रोगियों की संख्या में वृद्धि के सापेक्ष डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है।