भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) में स्कूलों, विभागों व उत्कृष्टता के केंद्र न खुलने पर जताई गई नाराजगी के बाद खलबली मच गई है।
अब आनन-फानन में बीबीएयू प्रशासन ने प्रो. एसके भटनागर की अध्यक्षता में छह सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है।
प्रो. भटनागर के अलावा इस कमेटी में प्रो. एनएमपी वर्मा, प्रो. डीपी सिंह, सभी संकायों के डीन, जिनके यहां स्कूल खोले जाने हैं, रजिस्ट्रार व फाइनेंस अफसर को सदस्य बनाया गया है। कमेटी को जांच जल्द पूरा कर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
बीबीएयू में 17 स्कूल व 55 विभाग खोले जाने थे, लेकिन अभी तक केवल 8 स्कूल व 22 विभाग ही खोले गए। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भूविज्ञान, ऊर्जा अध्ययन एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, भाषाएं एवं साहित्य, ललित कला, वाणिज्य व अंतरिक्ष विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विभाग नौ साल बाद भी नहीं बनाए गए।
इसके अलावा जो कोर्सेज चल रहे हैं, उसमें 25 प्रतिशत से लेकर 52 प्रतिशत तक ही स्टूडेंट हैं। यूनिवर्सिटी में शिक्षक व कर्मचारियों की 17 प्रतिशत से लेकर 57 प्रतिशत तक की कमी है। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। बीबीएयू प्रशासन की ढिलाई के चलते ही यह काम पूरा नहीं हो पाया।
अधूरे निर्माण पर उद्घाटन किया, अब होगी जांच
बीबीएयू में सेंटल लाइब्रेरी अभी तक अधूरी है और जो ऑडिटोरियम था उसका काम भी अधूरा पड़ा है। पूर्व कुलपति प्रो. बी हनुमैय्या इसका उद्घाटन भी कर चुके हैं।
काम अधूरा होने के कारण बीबीएयू प्रशासन ने इसके लिए भी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 14 सितंबर तक सौंपनी है। बीबीएयू की बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बाम) ने भी नाराजगी जताई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।