फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राहुल गांधी पर भड़के वीके सिंह, बोले- जानकारी नहीं तो मुंह बंद ही रखें

Fri, 14 Oct 2016 02:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने सैनिकों के खून की दलाली संबंधी राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है तो मुंह बंद रखना चाहिए।
विज्ञापन


लखनऊ आए जनरल सिंह ने मीडियाकर्मियों के सवालों के जवाब में कहा कि सैनिकों के खून की दलाली की बात वही कह सकता है जिसे जमीनी हालात की जानकारी नहीं है या जिसकी सोच छोटी है। देश के लिए कोई काम राजनीति से ऊपर उठकर किया जाए तो उसमें मीन-मेख नहीं निकालना चाहिए। सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांगना हारी मानसिकता का परिचायक है।

उन्होंने कहा, क्या 1971 में हुए युद्ध को लेकर कोई सवाल हुआ था? उस सफल युद्ध के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा था। अगर ओछी राजनीति होती तो क्या वे ऐसा बयान देते। सेना के ऑपरेशन पर सरकार ने तो कोई बयान नहीं दिया।
विज्ञापन


डीजीएमओ ने जो कुछ कहा, उसके बाद फुल स्टॉप लग जाना चाहिए। सेना के काम पर सवाल नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि सुबूत मांगने से नीच काम कोई और नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ परोक्ष युद्ध छेड़ रखा है। इसे देखते हुए हमें भी तैयारी रखनी चाहिए।

'राष्ट्रद्रोह की बात करें तो माना जाता है सेकुलर'

विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह का कहना है कि आज आप राष्ट्रवाद की बात करें तो आपको भाजपा से जोड़ दिया जाता है और राष्ट्रद्रोह की बात करें तो आपको सेकुलर माना जाता है। उन्होंने यह बात ‘राष्ट्रवाद और राष्ट्र’ विषय पर बृहस्पतिवार को राजधानी में आयोजित व्याख्यान के दौरान कही।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जनरल सिंह ने कहा कि देश ने कई आक्रमण सहे हैं, लेकिन हार तब हुई है, जब देश के ही कुछ लोगों ने आक्रमण करने वालों का साथ दिया।

जब तक हम जातियों और धर्म के नाम पर बंटे रहेंगे हमारे राष्ट्र पर सवालिया निशान लगा रहेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश पर जब भी संकट आता है नागरिक एक हो जाते हैं, लेकिन जिस तरह से देशवासियों को बांटने की राजनीति की जाती रही है, आने वाला समय मुश्किलों भरा हो सकता सकता है।

'जिन्ना ने अपनाई टू नेशन थ्योरी व मुसलमानों को भड़काया'

मौलाना कल्बे सादिक - फोटो : amar ujala
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि कुछ धर्म गुरु मुसलमानों को इस्लाम के नाम पर गलत राह पर ले जाते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का उदाहरण देकर कहा कि उन्होंने धर्म के आधार पर टू नेशन थ्योरी बनाई और मुसलमानों को भड़काया। लेकिन नतीजा सभी को पता है। भारत से पाकिस्तान गए मुसलमानों को आज भी मुहाजिर का ही दर्जा है। यह सब भावनाओं को धर्म के साथ जोड़कर किया गया।

इस मौके पर प्रो. मंसूर हसन, मेजर जनरल (रिटायर) एनबी सिंह, पूर्व मैराथन धाविका सुनीता गोदरा, यंग इंडियन संस्था के गौरव प्रकाश, मृणालिनी सिंह, उदय भारत संस्था के सिद्धार्थ शुक्ला ने भी अपने विचार रखे।

सेना से सीखने की जरूरत
जनरल सिंह ने कहा कि भारतीय सेना में धर्म और जात के नाम बंटवारा नहीं है, उसके लिए देश सर्वोपरि है। भारतीय सैनिक इसलिए युद्ध नहीं चाहते क्योंकि उन्हें पता है इससे देशवासियों पर क्या संकट आ सकते हैं।

जनरल सिंह ने कहा कि अमेरिका के लोग जब सैनिकों की टुकड़ी देखते हैं तो खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं। हमारे देश में भी सैनिकों के लिए इस तरह के भावना होनी चाहिए। देश प्रेम के लिए सैनिक सेवा जरूरी भले न हो लेकिन हर नागरिक को अपने क्षेत्र में देश के लिए सोचते हुए काम करना चाहिए।
विज्ञापन

मुसलमान पढ़ेंगे तो जिन्ना नहीं अब्दुल कलाम बनेंगे

मौलाना सादिक ने कहा कि मुसलमानों की सबसे बड़ी समस्या उनकी जहालत है, जिसकी वजह से कठमुल्ले उन्हें भड़काते हैं। ‘इस्लाम जिंदाबाद’ और ‘अल्लाह ओ अकबर’ जैसे नारों से भारतीय मुसलमानों का बहुत नुकसान किया है। कश्मीर में भी मुसलमानों को भड़काया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक चर्च बनता है तो उसके साथ स्कूल भी बनता है, लेकिन मस्जिदें वहीं बनवाई जाती हैं, जहां स्कूल आसपास न हो। अगर मुसलमानों को विज्ञान की शिक्षा दी जाएगी तो उनके बीच से जिन्ना और पाकिस्तानी तानाशाह लियाकत नहीं, बल्कि अब्दुल कलाम और अबुल कलाम जैसे व्यक्तित्व निकलेंगे।

लखनऊ का वैभव खटकता था अंग्रेजों को
जनरल सिंह ने कनीज मुराद की लिखी किताब ‘इन द सिटी ऑफ गोल्डन सिल्वर’ का उल्लेख करते हुए बताया कि लखनऊ को जीतना अंग्रेजों के लिए आन का विषय बन गया था। उस समय लखनऊ दुनिया का सबसे खूबसूरत और वैभवशाली शहर था। जब 1857 के समय में बेगम हजरत महल को नेपाल में नजरबंद करने के बाद उन्होंने लखनऊ को बुरी तरह लूटा। गुंबदों से सोने की पॉलिश को खुरच कर बोरों में भरकर इंग्लैंड भेज दिया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें