प्रदेश में कृषि क्षेत्र को लाभदायक बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) नीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत अगले तीन साल में दो हजार एफपीओ बनाए जाएंगे। उन्हें 5 लाख रुपये तक के बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान भी मिलेगा।
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राज्यस्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई में विशेषज्ञों को रखने का फैसला भी किया गया है। इस नीति के लागू होने से 10 लाख से अधिक किसान सीधे लाभांवित होंगे।
सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों को संगठित कर एफपीओ के गठन एवं प्रोत्साहन के लिए नीति बनाए जाने का निर्णय लिया है। एफपीओ के माध्यम से कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर लाभदायक दर पर बिक्री कर सकेंगे।
कृषि निवेशों की उपलब्धता और नवीनतम तकनीक के प्रयोग से उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि होगी। एफपीओ के गठन व क्षमतावर्धन पर आने वाला व्यय केंद्र सरकार की नवीन योजना से वहन किया जाएगा। साथ ही पूर्व में गठित 500 से अधिक कृषक उत्पादक संगठनों को भी सहयोग दिया जाएगा।
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एफपीओ के लिए कृषि विभाग होगी नोडल एजेंसी
प्रदेश में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन एवं प्रोत्साहन के लिए कृषि विभाग नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। राज्यस्तरीय प्रबंधन इकाई (पीएमयू) में कृषि, उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन व दुग्ध विकास, विपणन, आईटी, एमआईएस एवं विधि व लेखा के विशेषज्ञों के साथ सहयोगी कार्मिकों की टीम होगी।
यह इकाई प्रदेश में गठित होने वाले कृषक उत्पादक संगठनों का मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करेंगे। प्रदेश में दो हजार कृषक उत्पादक संगठन के गठन व क्षमतावर्धन पर आने वाला व्यय केंद्र सरकार की नवीन योजना से वहन किया जाएगा। साथ ही पूर्व में गठित 500 से अधिक कृषक उत्पादक संगठनों को भी सहयोग दिया जाएगा।
वर्ष 2020-210 से प्रारंभ इस कार्यक्रम में प्रथम वर्ष में 850, दूसरे वर्ष में भी 850 और तीसरे वर्ष में 300 एफपीओ का गठन व क्षमतावर्धन किया जाएगा। राज्यस्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई में कृषक उत्पादक संगठनों के गठन के लिए वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर लागू की जाएगी।
पहले से कार्यरत 500 एफपीओ समेत नए गठित होने वाले करीब दो हजार एफपीओ को ब्याज अनुदान भी मिलेगा। पांच लाख रुपये तक के प्रति एफपीओ बैंक ऋण पर 4 प्रतिशत का ब्याज अनुदान का भुगतान किया जाएगा।
इस पर 5 वर्षो (2020-21 से 2024-25) में कुल 15 करोड़ का व्यय भार आने का अनुमान है। इसी तरह से एफपीओ के प्रशासनिक, वित्तीय एवं वैधानिक कार्यों में सहयोग के लिए कंपनी सेक्रेटरी व सीए की सेवाएं पर आने वाला व्यय 50 लाख रुपये होगा।
यह व्यय राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के प्रशासनिक मद से वहन किया जाएगा। इससे प्रत्येक विकास खंड में सक्रिय एफपीओ का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। इससे किसानों को जहां उनके डोर स्टेप पर गुणवत्तायुक्त कृषि निवेश एवं तकनीकी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, वहीं भंडारण व मूल्य संवर्धन पर उत्पादों की बिक्री की सुविधा भी होगी।
इस नीति के लागू होने से प्रदेश के 10 लाख से भी अधिक किसान लाभांवित होंगे। व्यावसायिक गतिविधियों के संचोलन से स्थानीय स्तर पर कुशल एवं अकुशल, दोनों तरह के रोजगार भी सृजित होंगे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2023-24 तक देश में 10 हजार कृषक उत्पादक संगठनों के गठन का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए एसएफएसी, एनसीडीसी और नाबार्ड को क्रियांवयन एजेंसी नामित किया गया है। इन एजेंसियों की ओर से चयनित क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गनाइजेशन के माध्यम से एफपीओ के गठन, प्रशिक्षण, संचालन, विधि व लेखा संबंधी प्रकरणों में मदद की जाएगी। साथ ही इनके माध्यम से व्यावसायिक गतिविधियों के नियोजन, क्रियांवयन व समन्वय का कार्य सहयोगी संस्था के रूप में किया जाएगा।