राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजलीघरों ने इस वर्ष लागत में 38 पैसे प्रति यूनिट की कमी करके इतिहास बनाया है। इससे उत्पादन निगम को 1107 करोड़ रुपये की बचत हुई है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में उत्पादन निगम ने अब तक के इतिहास का सर्वाधिक 78.53 फीसदी वार्षिक प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) प्राप्त किया है।
बिजलीघरों में ईंधन की खपत में भी कमी आई है। वर्ष 2017-18 में विद्युत उत्पादन लागत 3.49 प्रति यूनिट थी जो 2018-19 में 3.11 प्रति यूनिट रही। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि कोयले एवं तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि एवं मेरिट ऑफ डिस्पैच ऑर्डर की प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर उत्पादन निगम की तापीय इकाइयों के दक्षता के पैरामीटर्स जैसे प्लांट लोड फैक्टर, आक्जलरी खपत, विशिष्ट तेल खपत, विशिष्ट कोल खपत एवं हीट रेट में सुधार कर विद्युत उत्पादन लागत कम करने की कार्ययोजना लागू की गई थी।
इसी के बदौलत उत्पादन निगम ने 78.53 फीसदी पीएलएफ प्राप्त किया है। यह वर्ष 2017-18 के मुकाबले 9.31 फीसदी ज्यादा है। वहीं, सहायक संयंत्र खपत 07.88 प्रतिशत रही जो 2017-18 के मुकाबले 0.66 प्रतिशत कम है।