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उपचुनाव: राष्ट्रीय राजनति में मुख्यमंत्री योगी का कद बढ़ाएगी मिल्कीपुर की जीत, ब्रांड हिंदुत्व को किया मजबूत

Sat, 08 Feb 2025 10:23 PM IST
ishwar ashish सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ

सार

मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा की जीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद बढ़ाएगी। वहीं, राष्ट्रीय राजनीति में उनकी प्रासंगिकता और कद भी बढ़ेगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के करीब आठ महीने में ही अयोध्या के सियासी समीकरण बदल गए। 2022 में अयोध्या की मिल्कीपुर सीट से सपा विधायक चुने गए अवधेश प्रसाद की फैजाबाद लोकसभा सीट से जीत को विपक्ष ने देशभर में भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति के पराभव के रूप में परिभाषित किया था और अवधेश को अयोध्या के राजा के रूप में प्रचारित कर भाजपा की विदाई की शुरुआत के दावे किए थे। उन्हीं अवधेश के पुत्र अजीत को भाजपा से मिली करारी शिकस्त ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता को राजा नहीं बल्कि सेवक की जरूरत है। यह भी माना जा रहा है कि यह नतीजा मुख्यमंत्री योगी की भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिकता और महत्व को और भी बढ़ाएगा।

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राजनीतिक रूप से देखा जाए तो भाजपा-सपा के लिए हॉट सीट बन चुकी मिल्कीपुर पर भाजपा को मिले जनादेश के अनेक निहितार्थ हैं। इस नतीजे ने बता दिया है कि परिवारवाद की राजनीति व सफलता की मनमानी परिभाषा के आधार पर मनमाने फैसले भी नहीं चलेंगे। वहीं, योगी का बंटेंगे तो कटेंगे का नारा जातिवाद के विरुद्ध हिंदुत्व की राजनीति को ताकत देने में लगातार सफल है। करहल हो या कटेहरी या फिर अब मिल्कीपुर। तीनों सीटों के चुनाव परिणाम से यह बात भी साफ हो गई है कि सीएम योगी हिंदुओं के दिमाग में यह बात बैठाने में सफल होते जा रहे हैं कि जाति तभी रहेगी जब हिंदुत्व रहेगा। ऐसे में विपक्ष की तरफ से हिंदुत्व पर प्रहार भाजपा के लिए राजनीतिक उपहार बनता जा रहा है।

यह भी माना जा रहा है कि अब आगे के सियासी रण में भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति के प्रभावहीन होने का दावा करना भी मुश्किल होगा और मुस्लिम तुष्टीकरण की सियासत पर भी एक सीमा से अधिक मुखरता भी संकट बढ़ाएगा। ऐसा होने पर भाजपा के लिए हिंदुत्व का कार्ड खेलना ज्यादा आसान हो जाएगा।
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राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं कि भाजपा ने राजनीति में नए चेहरों का जो प्रयोग शुरू किया है वह परिवारवादी राजनीति करने वालों के लिए चेतावनी है। अब एक ही परिवार के लोगों को बार-बार टिकट और नेतृत्व का मनमाना फैसला पार्टियों के काडर में नाराजगी भरेगा और हश्र मिल्कीपुर में सपा जैसा ही होगा।

हिंदुओं को किया एकजुट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा ने लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा को हराने के बाद से ही लगातार जिस तरह से आमजन की भावना से जुड़ी अयोध्या में भाजपा के पराभव और राष्ट्रीय राजनीति में हिंदुत्व कार्ड के पतन के रूप में प्रचारित कर रही थी। इसने भी सभी गैर हिंदू जातियों को लामबंद करने में मदद की। सपा ने अपनी जीत का गलत अर्थ निकालकर अवधेश प्रसाद के जरिये जिस तरह पूरे क्षेत्र में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति शुरू कर दी थी, इससे भी कहीं न कहीं भाजपा को हिंदुत्व के कार्ड को धार देने में मदद की। योगी के बंटेंगे तो कटेंगे नारे को लेकर चुनाव मैदान में उतरे कार्यकर्ताओं ने इसे अयोध्या, राम और हिंदुत्व की प्रतिष्ठा से जोड़कर हिंदुओं को एकजुट करने में सफलता पा ली।

सीएम ने सपा के ही दांव से काटी जड़
देखा जाए तो सीएम योगी ने बंटेंगे तो कटेंगे नारे के जरिये सपा के ही दांव से उसकी काट की रणनीति बुनी थी। उन्होंने मिल्कीपुर के सहारे अवधेश को अयोध्या का राजा बताने वाले सपा के प्रचार को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के अपमान और हिंदुओं के स्वाभिमान से जोड़ दिया। दिवाली के मौके पर उन्होंने जिस तरह से केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अयोध्या सहित पूरे जिले के विकास के लिए शुरू की गई योजनाओं का उल्लेख कर यह याद दिलाने की कोशिश की कि भाजपा के इतना विकास करने के बाद यदि आप किसी और को वोट देकर जिताते हैं तो आप अपने विकास की राह अवरुद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका भी लाभ भाजपा को मिला है।

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