दवा सप्लाई की नहीं बता पाए वजह
जौनपुर में जिस गोदाम में कोडीनयुक्त सीरप फेंसडिल पकड़ी गई थी, उसका लाइसेंस भी नहीं था। इस सीरप को रखने वाले के पास खरीद संबंधित अन्य दस्तावेज भी तत्काल नहीं मिले थे। ऐसे में आशंका जताई गई कि संबंधित गोदाम से यह दवा आसपास के बाजारों में आपूर्ति की जाती, जिसकेजरिए नश के कारोबार को बढावा मिलता।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
केजीएमयू पेन क्लीनिक प्रभारी प्रो सरिता सिंह बताती हैं कि यह मार्फिन का ही एक रूप होता है। सामान्य मरीजों को यह दवा कोडीनयुक्त दवाएं नहीं दी जाती हैं। पहले खांसी को दबाने, खून की उल्टी होने, कैंसर के मरीजों आदि में इसका प्रयोग होता था, लेकिन अब कई नई दवाएं आ गई हैं। ऐसे में इसका प्रयोग नहीं किया जाता है। कुछ परिस्थितियों में यह सीरप बच्चों को दिया जाता है, लेकिन चिकित्सक की निगरानी में। कोडीनयुक्त दवा का अधिक सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक है। इसकी अधिक डोज लिवर, किडनी सहित अन्य आर्गन को प्रभावित कर सकती है।