सरकारी व इससे जुड़े विभागों की खाली पड़ी अनुपयोगी जमीनों पर औद्योगिक अवस्थापना विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
इसके लिए सरकारी विभागों व संस्थाओं द्वारा ऐसी अनुपयुक्त जमीनों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस संबंध में प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग (आईआईडीडी) डॉ. सूर्य प्रताप सिंह की अध्यक्षता में 22 सरकारी विभागों के अधिकारियों की बैठक हुई।
प्रमुख सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे एक सप्ताह के भीतर अनुपयोगी भूमि का ब्योरा संकलित कर उपलब्ध कराएं, जिससे अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के लिए उपयुक्त भूमि का चिह्नीकरण कर संबंधित विभागों को आवंटित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अवस्थापना व औद्योगिक निवेश नीति 2012 में अवस्थापना व औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने के लिए भूमि बैंक के सृजन का प्राविधान किया गया है, क्योंकि इसके लिए जमीन की काफी जरूरत है। इसलिए दो फसली जमीन को अवस्थापना विकास से बचाने के लिए अनुपयुक्त सरकारी जमीन का उपयोग किया जाएगा।