हुसैनाबाद स्थित घंटाघर पार्क के पास बने एमएलसी मजहर अली खां उर्फ बुक्कल नवाब और उनके परिवारीजनों की तीन बहुमंजिला इमारतों के अवैध निर्माण को तोड़ना होगा।
एलडीए के विहित प्राधिकारी के आदेश को चुनौती देने वाली अपील को मंडलायुक्त और एलडीए बोर्ड के अध्यक्ष अनिल गर्ग ने खारिज कर दिया है।
उन्हें खुद अपने अवैध निर्माण तोड़ने को 30 दिन का समय दिया गया है। ऐसा न होने पर एलडीए को कार्रवाई के निर्देश मंडलायुक्त ने दिए हैं।
मंडलायुक्त अनिल गर्ग ने बुक्कल नबाव और उनके परिवारीजनों की अपील पर सुनवाई की।
अपील 12 मई को तत्कालीन विहित प्राधिकारी धनंजय शुक्ला के आदेश को चुनौती देने को की गई। इसमें कहा गया कि नक्शे के विपरीत निर्माण तोड़ने की जगह उसका शमन कर दिया जाए, जबकि विहित प्राधिकारी के आदेश में एकल आवासीय नक्शा पास कराने के बाद बहुमंजिला निर्माण कराने के चलते उन्हें तोड़ने का आदेश किया गया था।
इस निर्माण को विहित प्राधिकारी ने अशमनीय माना। सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने भी विहित प्राधिकारी के आदेश को सही माना।
मंडलायुक्त के आदेश के मुताबिक अब बुक्कल नवाब और उनके परिवारीजनों को अपने निर्माण में अशमनीय भाग को खुद ही तोड़ना होगा। इसके बाद शमनीय भाग को नियमित कराने को शमन मानचित्र एलडीए में 15 दिन में दाखिल करना होगा।
इसके लिए 30 दिन का समय उनके पास है। इसके बाद एलडीए के विहित प्राधिकारी का आदेश प्रभावी होगा। ऐसे में एलडीए उनके अवैध निर्माण को तोड़ सकेगा।
पुरानी सरकार में रसूख का फायदा
बुक्कल नवाब का पिछली सरकार में रसूख था। इस वजह से विवाद के बाद भी एकल आवासीय में नक्शा एलडीए से पास करा लिया गया। सपा के एमएलसी होने से नक्शे के विपरीत निर्माण भी पूरा होने दिया गया।
सरकार बदलने के बाद अब उनके अवैध निर्माण पर एलडीए ने कार्रवाई शुरू की। सरकार बनने के दो महीने के अंदर ही इसे तोड़ने के आदेश भी कर दिए गए। हाल ही में वे भाजपा में भी शामिल हुए लेकिन अवैध निर्माण पर आए फैसले ने उन्हें झटका ही दिया है।
यह भी दिया तर्क, जो काम नहीं आया
विहित प्राधिकारी की कोर्ट में बुक्कल नवाब की तरफ से उपस्थित हुए वकील ने तर्क दिया कि नवाब परिवार काफी बड़ा है। ऐसे में जो बिल्डिंग बनी है उसमें उनके ही परिवार के लोग रह रहे हैं।
परिवार बड़ा होने से उन्होंने अतिरिक्त तल का निर्माण करा लिया। यह निर्माण आवासीय है। यह व्यावसायिक निर्माण नहीं है। नक्शे के विपरीत हुए निर्माण का शमन भी कराने के लिए प्रार्थी तैयार है। हालांकि, विहित प्राधिकारी ने इस आरोप को नकार दिया था।