लखनऊ। बिल्डर ने फ्लैट का कब्जा सहित अन्य सुविधाओं में कटौती कर दी तो आवंटी ने राज्य उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार और सदस्य सुशील कुमार ने फैसला सुनाते हुए अलग-अलग धनराशि पर ब्याज और वाद व्यय का खर्च देने का आदेश सुनाया।
इंदिरानगर निवासी नीरू श्रीवास्तव ने विराज कंस्ट्रक्शन की एमडी अलका दास गुप्ता, लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और सनब्रीज वन अपार्टमेंट वेलफेयर एसोसिएशन के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था। इसमें आरोप लगाया था कि 46.61 लाख रुपये देने के बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। उन्होंने इस राशि पर ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए पांच लाख, पार्किंग के लिए जमा राशि 1.5 लाख पर ब्याज, क्लब राशि और मेंटेनेंस आदि के मद में दी गई धनराशि पर भी ब्याज की मांग की थी। उन्होंने अधूरे निर्माण और घटिया निर्माण की शिकायत भी की थी।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आयोग ने आदेश दिया कि नीरू श्रीवास्तव को 45.51 लाख पर 23 माह का ब्याज नौ फीसदी सालाना की दर से दिया जाए। इसके साथ ही गैराज, क्लब और मेंटेनेंस की मद में दिए गए धन पर भी 23 माह का ब्याज देने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त मानसिक प्रताड़ना के रूप में 2.5 लाख और परिवाद व्यय पर 25 हजार रुपये अलग से देने होंगे।