मानवीय संवेदनाओं को झकझोर गई बूढ़ी काकी
लखनऊ। बीएनए में बृहस्पतिवार को महान लेखक प्रेमचंद की कहानी पर आधारित बूढ़ी काकी नाटक का मंचन किया गया। अभिषेक पंडित की ओर से निर्देशित इस नाटक का सबसे मार्मिक दृश्य बुद्धिराम के बेटे सुखराम के तिलक समारोह का था। इसमें मेहमान, घरवालों, गाजे-बाजे वालों और वंचितों ने भी भोजन कर लिया लेकिन बूढ़ी काकी को किसी ने नहीं पूछा। देर रात जब बूढ़ी काकी को भूख लगी तो जूठे पत्तलों के पास बैठकर जूठन खाने लगीं। इस हृदय विदारक दृश्य और घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया। नाटक में ममता पंडित, डाॅ. अलका सिंह, नेहा रिद्धि मित्रा, शिवा कुमार यादव, अंगद कश्यप और सत्यम कुमार की अदाकारी को दर्शकों ने खूब सराहा।
मानवीय संवेदनाओं को झकझोर गई बूढ़ी काकी
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मानवीय संवेदनाओं को झकझोर गई बूढ़ी काकी
मानवीय संवेदनाओं को झकझोर गई बूढ़ी काकी
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