लखनऊ के विकास का वादा करने वाले गृहमंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह ने केंद्र की मदद से लखनऊ की धरोहर को सहेजने की तैयारी कर ली है। चिकन, जरदोजी और आरी के कारोबार और इससे जुड़े कारीगरों और कारोबारियों को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में बड़ा तोहफा दिया है।
उन्होंने बृहस्पतिवार को आम बजट के दौरान लखनऊ में टेक्सटाइल क्लस्टर जोन विकसित करने की घोषणा की। इस तरह के कई टेक्सटाइल क्लस्टर गुजरात में पहले से ही विकसित किए जा चुके हैं।
टेक्सटाइल क्लस्टर जोन विकसित होने से लखनऊ सहित बाराबंकी और टांडा तक के बुनकरों, दस्तकारों और कपड़ा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
शहर में कहीं करीब 300 एकड़ क्षेत्र में यह जोन विकसित किया जाएगा। इसमें लीडा और यूपीएसआईडीसी जैसी एजेंसियों की भी केंद्र सरकार मदद मिलेगी। इस जोन से दस्तकारों को तो लाभ मिलेगा ही, नए रोजगार का भी सृजन होगा। इसमें इस बात का संदेह नही है कि केंद्र ने लखनऊ को यह तोहफा राजनाथ के कारण ही दिया है।
हर साल होता है 1000 करोड़ का कारोबार
राजधानी से हर साल चिकन के कपड़ों का देश के भीतर ही करीब 1000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसके अलावा विदेशों में भी निर्यात किया जाता है। आरी और जरदोजी की कढ़ाई वाले वस्त्रों को निर्यात भी लगभग 500 करोड़ रुपये सालाना है।
ऐसे में टेक्सटाइल्स क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को अगर अपनी यूनिट लखनऊ में लगाने का मौका मिलने से यहां के कारीगरों को काफी लाभ होगा। इसके लिए जल्द ही केंद्र सरकार की टीम लखनऊ आकर इस जोन के लिए मुफीद जगह की तलाश करेगी।
बिचौलियों से बचाएगा टेक्सटाइल जोन
चिकन और अन्य दस्तकारी से जुड़े कारीगरों के लिए सबसे बड़ी आफत बिचौलिए हैं। चौपटिया के चिकन दस्तकार रईस अहमद बताते हैं कि जिस कुर्ते पर चिकन कढ़ाई करने में कारोबारी केवल 50 से 150 रुपये खर्च करता है और कपड़े की कीमत 200 रुपये से अधिक नहीं होती है, बाजार में वही कुर्ता 600 से 1500 रुपये में बिकता है।
ऐसे में बिचौलियों की वजह से दस्तकारों का मेहनताना नहीं बढ़ पा रहा है। मगर टेक्सटाइल जोन आने के बाद इन कारीगरों को सरकार की ओर से सीधी मदद मिलेगी। उनके उत्पादों को बिकवाने, प्रदर्शनी लगवाने और उनकी ब्रांडिंग में केंद्र सरकार सहायता करेगी। न केवल दस्तकारों बल्कि व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
माल को निर्यात करने में मिलेगी मदद
चौक के कारोबारी शैलेंद्र कक्कड़ बताते हैं कि अभी तक माल का निर्यात करना छोटे कारोबारियों के लिए संभव नहीं था। क्लस्टर जोन विकसित होने के बाद इस तरह की नीतियां बनेंगी, जिससे अधिक से अधिक कारोबारियों को निर्यात क्षेत्र में मदद मिल सकेगी।
विदेशों में भारतीय दस्तकारी के शौकीनों को लखनऊ की टेक्सटाइल क्लस्टर तक लाने का काम भी किया जाएगा। इससे निर्यात बढ़ेगा और कारोबार से जुड़े लोगों का फायदा भी।
आसपास के जिलों तक लाभ की बयार
आसपास के जिलों तक क्लस्टर जोन के लाभ की बयार पहुंचेगी। बाराबंकी के मसौली और अन्य गांवों में बुनकर बड़ी मात्रा में सूती कपड़ा बनाते हैं। इसके अलावा फैजाबाद के टांडा तहसील और हरदोई में भी बुनकर काफी काम कर रहे हैं। इन लाखों कारीगरों को भी क्लस्टर जोन का लाभ मिलेगा।
इस पर राजनाथ सिंह के डवलपमेंट प्लान के प्रभारी व पूर्व एलडीए वीसी दिवाकर त्रिपाठी का कहना है कि ये क्लस्टर जोन गुजरात की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसे सुल्तानपुर रोड, सीतापुर रोड, या कानपुर रोड पर भूमि लेकर क्लस्टर जोन विकसित किया जाएगा। इसमें लीडा और यूपीएसआईडीसी भी मदद करेंगे।
वादे पर अमल कर रहे राजनाथ
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि केंद्रीय बजट में लखनऊ मेट्रो परियोजना को आर्थिक रजामंदी मिलने से जहां शहर की रफ्तार बढ़ेगी और सूबे की राजधानी आधुनिकता की ओर जाएगी।
वहीं, टेक्सटाइल क्लस्टर जोन विकसित होने से शहर की धरोहर के रूप में विकसित हो चुकी दस्तकारी को विकास की नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इतना ही नहीं, इस काम से जुड़े लाखों हुनरमंद हाथ भी समृद्धि होंगे।
लखनऊ की पहचान रहे इस पेशे के बढ़ने से दुनिया भर में लखनऊ को प्रसिद्घि मिलेगी। गौरतलब है कि राजनाथ ने आमचुनाव में जीत के बाद लखनऊ के विकास का वादा किया था और उस पर अमल करते भी दिख रहे हैं।