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Lucknow News: अनुयायियों से गुलजार रही बौद्ध तपोस्थली

Fri, 20 Sep 2024 05:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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गंधकुटी का भ्रमण करते बौद्ध अनुयायी। संवाद
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। श्रीलंका से आए 500 उपासकों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक के नेतृत्व में जेतवन परिसर में पूजा व विशेष प्रार्थना की। इस दौरान अनुयायियों ने तपोस्थली की परिक्रमा कर बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम, गच्छामि धम्मम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया।
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बौद्ध भिक्षु दीपालोक थेरो ने कहा कि बुद्ध ने धर्मचक्र मुद्रा का चित्रण किया है जो हृदय के सामने दोनों हाथों को रखकर बनाई गई एक संयुक्त हस्त मुद्रा है। इस मुद्रा का सामान्य प्रदर्शन तब होता है जब तर्जनी और अंगूठे के सिरे एक-दूसरे को छूकर एक वृत्त बनाते हैं।

अंदर की ओर मुंह किए हुए बाएं हाथ को बाहर की ओर मुंह किए हुए दाएं हाथ से ढका जाता है। शेष तीन अंगुलियों को तीन रत्नों के रूप में समझाया गया है- बौद्ध, धर्म और संघ। धर्मचक्र मुद्रा से संकेत मिलता है कि शिक्षाएं बुद्ध के हृदय से हैं। धर्मचक्र के पहले मोड़ से जुड़ा हुआ है जिसे पूर्ण चक्र के रूप में गतिमान किया गया था। धर्मचक्र मुद्रा के कई रूप हैं।
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गांधार कला की इंडो ग्रीक शैली, दाहिना हाथ, बाएं हाथ में जुड़ी हुई उंगलियों को ओवरलैप करता है। विस्तारित मध्यमा और तर्जनी शिक्षा के श्रोताओं और उसे समझने वालों का प्रतिनिधित्व करती है। इस पंक्ति में सभी छोटी आकृतियां या तो मुद्रा धारण किए हुए हैं या मुद्रा धारण करने का अभ्यास कर रही हैं जो बुद्ध की कई स्वीकृत शिक्षाओं को दर्शाती हैं। वहीं पूजन के उपरांत सभी अनुयायियों ने सभा मंडप, शिवली स्तूप, सूर्यकुंड, कौशांबी कुटी, कच्ची कुटी, पक्की कुटी आदि का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
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