केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में कार्यशाला में शामिल शिक्षक व विशेषज्ञ
लखनऊ। अब भगवान गौतम बुद्ध के उपदेशों का अध्ययन संस्कृत में भी किया जा सकेगा। गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में पालि भाषा में रचित ग्रंथों का संस्कृत और हिंदी में अनुवाद किया जा रहा है। इसके साथ ही इन ग्रंथों के गहन अध्ययन पर भी कार्य जारी है।
विश्वविद्यालय के बौद्ध दर्शन विद्याशाखा के विभागाध्यक्ष प्रो. गुरुचरण सिंह नेगी ने बताया कि पालि अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला बुधवार से चल रही है। इसमें पालि साहित्य के संशोधन, संपादन की आधुनिक विधियों, संस्कृतच्छाया के अध्ययन की तकनीक और प्राचीन ग्रंथों के संपादन पर काम किया जा रहा है।
पालि साहित्य के विशेषज्ञ और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रो. उमाशंकर व्यास ने बताया कि पालि और संस्कृत भाषाएं सहोदरी हैं, इसलिए दोनों के बीच छायानुवाद संभव है। भाषाई समानताओं के कारण इन ग्रंथों को संस्कृत में रूपांतरित करना आसान होता है।
नव नालंदा महाविहार (मानित विश्वविद्यालय), नालंदा के पूर्व कुलपति प्रो. राम नक्षत्र प्रसाद ने कहा कि पालि ग्रंथों का देश की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद जरूरी है, ताकि बुद्ध के विचार आम लोगों तक पहुंच सकें और अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हों।
बहुभाषिक शब्दकोष और डिजिटल टूल्स पर काम
प्रो. नेगी के अनुसार, भविष्य में पालि भाषा के शिक्षण के लिए विशेष ग्रंथ तैयार किए जाएंगे। साथ ही बहुभाषिक शब्दकोष और कम्प्यूटेशनल टूल्स भी विकसित किए जाएंगे। केंद्र को आदर्श पालि शोध संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है। पालि अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र के सह संयोजक डॉ. प्रफुल्ल गड़पाल ने बताया कि अब विश्वविद्यालय में बीए ऑनर्स पालि पाठ्यक्रम के तहत देश-विदेश के छात्र भी अध्ययन कर सकेंगे।