भाजपा की दलितों को जोड़ने की मुहिम की काट में बसपा ने मिशन मोड में काम शुरू किया है। भाईचारा कमेटियों के जरिए बसपा दलितों में फिर से पैठ बढ़ाने के साथ सर्वसमाज में विस्तार की रणनीति बनाई है। इसके लिए मंडल स्तर पर बैठकें पूरी होते ही 16 जून से जिला स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की बैठकें शुरू हो जाएंगी।
लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रदेश की भाजपा सरकार ने पहला ही फैसला दलितों को प्रभावित करने के लिहाज से उठाया तो बसपा ने इसे समझने में देर नहीं की है। बसपा के एक जिम्मेदार नेता कहते हैं कि भाजपा को पता है कि 2022 का विधानसभा चुनाव बसपा से ही होना है।
ऐसे में भाजपा सरकार ने चुनाव नतीजे आते ही दलितों को ध्यान में रखकर चालें चलनी शुरू कर दी हैं। 50 प्रतिशत से अधिक एससी आबादी वाले गांवों को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत लाकर उनके सर्वांगीण विकास का फैसला सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
यह योजना 2009-10 में यूपीए सरकार ने शुरू की थी। अब भाजपा सरकार दलित बहुल 724 गांवों में यह योजना लागू करने की बात कर दलितों को भरमाने की तैयारी कर रही है। वे कहते हैं बसपा, भाजपा की यह चाल समझ गई है। बसपा की भाईचारा कमेटियां बनाने की मुहिम न सिर्फ दलितों में पार्टी की पैठ फिर से बढ़ाएगी, बल्कि सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाने में कारगर साबित होगी।